पटना: 14 सितंबर 2025 :: अनुग्रह नारायण महाविद्यालय, पटना में आज 8वां ‘बिहार छात्र संसद’ भव्य रूप से आयोजित हुआ। कार्यक्रम के संस्थापक अंकित कुमार के आमंत्रण पर इसमें बिहार सरकार के मंत्री नितिन नवीन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। प्रमुख अतिथियों में मौलाना कल्बे रुशैद रिज़वी, रत्नेश कुशवाहा, राहुल झा, वरुण कुमार, अधिवक्ता कुमार शानु समेत विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों प्रतिभाशाली युवा उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विकास वैभव ने कहा कि –
“हम सभी 2047 तक विकसित भारत का निर्माण चाहते हैं, लेकिन यह तभी संभव है जब हम पहले विकसित बिहार का निर्माण कर सकें। ऐसा बिहार, जहां शिक्षा या रोजगार के लिए किसी को राज्य से बाहर न जाना पड़े।”
उन्होंने बताया कि भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के हालिया डाटा से यह स्पष्ट है कि बिहार आज तीव्र गति से प्रगति कर रहा है। स्थाई मूल्य पर बिहार की वृद्धि दर 8.64% और वर्तमान मूल्य पर 13.09% है, जो देश में दूसरे स्थान पर है। 2023-24 में राज्य की प्रति व्यक्ति आय ₹68,624 थी, जो 2024-25 में बढ़कर ₹76,490 हो गई है।
हालांकि उन्होंने यह भी चेताया कि बिहार की औसत मासिक आय मात्र ₹6,374 है, जो पूरे देश में सबसे कम है। दिल्ली में यह ₹46,060 और पड़ोसी पश्चिम बंगाल में ₹15,148 है। विकास वैभव ने कहा कि यदि बिहार 15% की दर से भी आगे बढ़ता रहा, तो भी 2035 तक प्रति व्यक्ति आय केवल ₹25,786 तक पहुंचेगी, जबकि कई राज्य आज ही इससे आगे हैं।

उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि केवल सरकारी नौकरियों से रोजगार की चुनौती नहीं सुलझेगी। युवाओं को “जॉब-सीकर” नहीं बल्कि “जॉब-क्रिएटर” बनना होगा। उद्यमिता और स्टार्ट-अप संस्कृति ही बिहार की अर्थव्यवस्था को बदल सकती है।
बिहार सरकार की आइडिया फेस्टिवल जैसी पहल और औद्योगिक निवेश के लिए भूमि अधिग्रहण में किए गए सुधार को उन्होंने सराहनीय बताया। साथ ही कहा कि “पलायन रोकने के लिए हमें अन्य राज्यों से आर्थिक अंतर 2047 तक खत्म करना होगा।”
उन्होंने स्मरण कराया कि #LetsInspireBihar अभियान के तहत 24 अगस्त 2025 को पटना में ‘स्टार्ट-अप समिट 2025’ में विजन डॉक्यूमेंट जारी किया जा चुका है। आज 2.5 लाख से अधिक संकल्पित बिहारवासी जाति, संप्रदाय, लिंगभेद और विचारधारा से ऊपर उठकर इस अभियान के माध्यम से राष्ट्रहित में योगदान दे रहे हैं।
अंत में विकास वैभव ने कहा –
“हम उन्हीं यशस्वी पूर्वजों की संतान हैं, जिन्होंने विश्वविद्यालय और साम्राज्य खड़े किए थे, जब आधुनिक तकनीक और संसाधन नहीं थे। उसी विरासत से प्रेरणा लेकर हमें भविष्य के लिए नए कीर्तिमान गढ़ने हैं। यात्रा गतिमान है!”