दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन ने गौतम बुद्ध महिला कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित किया परिचर्चा

Uncategorized

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गया स्थित गौतम बुद्ध महिला कॉलेज (GBM कॉलेज) में महिला सशक्तिकरण को समर्पित एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था “महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में युवतियों की भूमिका।” इस अवसर पर कॉलेज परिसर में उत्साह और जागरूकता का वातावरण देखने को मिला। छात्राओं, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अतिथियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर महिलाओं की शक्ति, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के महत्व पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें सामाजिक, आर्थिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाना था, ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बनकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज की प्रभारी प्रधानाचार्या डॉ. शगुफ्ता अंसारी ने की। कार्यक्रम का संचालन और समन्वयन एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक शांति पाठ और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और प्रेरणादायी बना दिया।

दीप प्रज्वलन समारोह में मुख्य वक्ता साहित्यकार डॉ. सच्चिदानंद प्रेमी, दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन के अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार सिन्हा, उपाध्यक्ष डॉ. रिचा दुबे, निदेशक डॉ. राकेश दत्त मिश्र, एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी और एनसीसी सीटीओ डॉ. नगमा शादाब सहित अन्य अतिथियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का कॉलेज प्रशासन द्वारा पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र देकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। इससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई।

कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत भाषण देते हुए डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने अपनी स्वरचित कविता “हर नारी में है नवदुर्गा” प्रस्तुत की। इस कविता में उन्होंने नारी के विभिन्न रूपों- ममता, शक्ति, त्याग और संघर्ष, का भावपूर्ण चित्रण किया। उन्होंने कहा कि नारी केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं है, बल्कि वह समाज की संस्कारदात्री और राष्ट्र निर्माण की प्रेरक शक्ति भी है। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी बनने के बजाय सहयोगी बनना चाहिए। जब महिलाएँ एक-दूसरे का सहयोग करती हैं, तभी समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव होता है।

दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन के निदेशक डॉ. राकेश दत्त मिश्र ने कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के अधिकार, सम्मान और उनके योगदान को स्मरण करने का अवसर है। उन्होंने भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है— “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।” अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवताओं का वास होता है।

उन्होंने कहा कि आज की महिलाएँ शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, राजनीति, कला, खेल और सामाजिक सेवा जैसे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। फिर भी समाज में कई चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। इसलिए महिलाओं के लिए शिक्षा, जागरूकता और समान अवसर सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने एक प्रेरणादायी संस्कृत श्लोक भी उद्धृत किया—“उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥” इसका अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि सफलता केवल इच्छाओं से नहीं मिलती, बल्कि परिश्रम और प्रयास से प्राप्त होती है।

मुख्य वक्ता साहित्यकार डॉ. सच्चिदानंद प्रेमी ने अपने संबोधन में महिलाओं की सामाजिक भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज के निर्माण तथा उसके संतुलित संचालन में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि वहाँ महिलाओं को कितना सम्मान और अवसर मिलता है। जहाँ महिलाओं का सम्मान होता है, वहाँ सुख, समृद्धि और सफलता का वास होता है। उन्होंने छात्राओं से आग्रह किया कि वे शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएँ और आत्मनिर्भर बनकर समाज के लिए प्रेरणा बने।

दिव्य जीर्णोद्धार फाउंडेशन की उपाध्यक्ष डॉ. रिचा दुबे ने अपने संबोधन में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया। उन्होंने अपनी स्वलिखित कविता के माध्यम से महिलाओं की संघर्षशीलता और शक्ति को उजागर किया। उन्होंने कहा कि आज की महिलाएँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन उन्हें आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बनना आवश्यक है। आर्थिक स्वतंत्रता महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाती है और उन्हें निर्णय लेने की शक्ति देती है।

फाउंडेशन के अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार सिन्हा ने भी परिचर्चा में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज की महिलाएँ शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कुछ प्रेरणादायी उदाहरणों के माध्यम से बताया कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।

इस अवसर पर प्रो. अफशां सुरैया, डॉ. नगमा शादाब, डॉ. वीणा कुमारी जायसवाल, प्रीति शेखर और डॉ. फरहीन वज़ीरी सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का सबसे मजबूत आधार शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और वित्तीय जागरूकता है। उन्होंने छात्राओं को भविष्य के लिए बचत की आदत अपनाने और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा परिचर्चा सत्र रहा, जिसमें छात्राओं ने सक्रिय और तर्कपूर्ण भागीदारी की। इस दौरान छात्रा मानसी कुमारी ने महिलाओं की समस्याओं और विभिन्न क्षेत्रों में उनकी बहुआयामी भूमिका पर एक प्रभावी प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति को सभी उपस्थित लोगों ने सराहा। इस सत्र ने छात्राओं को अपने विचार व्यक्त करने और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान किया।

परिचर्चा में सक्रिय भागीदारी करने वाली छात्राओं को प्रमाण-पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाली छात्राओं में एनएसएस वॉलेंटियर अनीषा, अन्या, दीपशिखा मिश्रा, गीतांजलि, शिवानी, शुभांगी, नैना, श्रेया, अंजली, कोमल, प्रियांशु, खुशी परवीन, मुस्कान, सृष्टि सहित अन्य शामिल थीं। इसके अलावा एनसीसी कैडेट काव्या शर्मा, मानसी, आँचल, ब्यूटी, चाँदनी, श्वेता, स्वेच्छा, साक्षी और रानी को भी सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह ने छात्राओं के उत्साह और आत्मविश्वास को और अधिक बढ़ाया।

कार्यक्रम के अंत में अध्यक्षीय संबोधन देते हुए कॉलेज की प्रभारी प्रधानाचार्या डॉ. शगुफ्ता अंसारी ने सभी को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण से पूरे समाज का विकास संभव है। जब एक महिला शिक्षित होती है, तो वह पूरे परिवार और समाज को शिक्षित करती है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे अपने सपनों को साकार करने के लिए मेहनत करें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करें।

कार्यक्रम का सफल संयोजन डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी और डॉ. नगमा शादाब ने संयुक्त रूप से किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. फरहीन वज़ीरी ने किया। इस अवसर पर कॉलेज के अनेक प्राध्यापक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रहीं। इनमें प्रेम सागर पांडेय, रमेश कुमार, पप्पू कुमार, डॉ. रुखसाना परवीन, डॉ. बनीता कुमारी, डॉ. प्रमिला कुमारी, डॉ. सीता, डॉ. विजेता लाल, डॉ. फातिमा, डॉ. आशुतोष कुमार पांडेय सहित कई गणमान्य लोग शामिल थे।
गौतम बुद्ध महिला कॉलेज में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह महिलाओं के आत्मविश्वास, जागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। इस कार्यक्रम ने छात्राओं को यह संदेश दिया कि शिक्षा, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास के माध्यम से वे अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकती हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इस अवसर पर आयोजित यह परिचर्चा वास्तव में महिला सशक्तिकरण के संदेश को व्यापक रूप से फैलाने का एक प्रेरणादायी प्रयास साबित हुई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *