भामती-वाचस्पति महोत्सव 2026 में महिलाओं के मुद्दे रहे केंद्र में, वेदांग सर्किट की उठी मांग

Art and culture

मधुबनी/पटना: 9वीं-10वीं शताब्दी के महान दार्शनिक पं. वाचस्पति मिश्र की जयंती के अवसर पर कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार तथा जिला प्रशासन मधुबनी के संयुक्त तत्वावधान में अँधडा ठाढी (मधुबनी) में आयोजित भामती-वाचस्पति महोत्सव 2026 में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और गृह उद्योग में उनकी भूमिका पर विशेष चर्चा हुई।

कार्यक्रम का मुख्य विषय “मिथिला के गृह उद्योग में महिलाओं की सहभागिता” रहा। विषय प्रवेश करते हुए पं. वाचस्पति मिश्र स्मारक निर्माण समिति के अध्यक्ष रत्नेश्वर झा ने कहा कि अँधडा ठाढी केवल वाचस्पति मिश्र ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी भामती की भी कर्मभूमि रही है। उन्होंने कहा कि भामती के समर्पण और परिश्रम से प्रभावित होकर ही वाचस्पति मिश्र ने अपनी महत्वपूर्ण कृति उनके नाम समर्पित की थी, इसलिए इस मंच पर महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि मिथिला की महिलाएं पारंपरिक गृह उद्योग को आधुनिक व्यवसाय का रूप दे रही हैं। घरों में बनने वाले पारंपरिक खाद्य उत्पाद अब बाजार में बिक रहे हैं। इसके साथ ही टेराकोटा, बाँस शिल्प और विशेष रूप से मिथिला चित्रकला का ऑनलाइन विपणन तेजी से बढ़ा है।
मिथिला कलाकार रानी झा ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी नई नहीं है, बल्कि वे पहले से ही तकली के माध्यम से जनेऊ का सूत बनाकर इस परंपरा को आगे बढ़ाती रही हैं।

वरिष्ठ पत्रकार एवं कला लेखिका रीना सोपम ने कहा कि मिथिला की महिलाओं ने अपनी पारंपरिक चित्रकला को ही व्यवसाय में बदलकर गृह उद्योग की नई दिशा दी है। जो चित्र पहले घरों की दीवारों तक सीमित थे, वे अब कपड़ों और कागज पर उतरकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँच चुके हैं।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब घर में लगी पेंटिंग्स विदेशी मेहमानों को आकर्षित करने लगीं और उनके प्रति खरीदारी की रुचि बढ़ी, तब इस कला के व्यावसायिक महत्व का अहसास हुआ। आज यह कला अनेक परिवारों के जीवन-यापन का आधार बन चुकी है और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मिथिला की अर्थव्यवस्था में महिला उद्यमियों की वास्तविक भागीदारी पर अभी तक समुचित अध्ययन नहीं हुआ है। इस दिशा में शोध और महिला कलाकारों के कार्यों का दस्तावेजीकरण आवश्यक है, जिसमें केवल संघर्ष ही नहीं, बल्कि सफलता की कहानियों को भी स्थान मिलना चाहिए।

रीना सोपम ने यह भी बताया कि अँधडा ठाढी, पं. वाचस्पति मिश्र सहित कई दार्शनिकों की जन्मस्थली होने के कारण यहाँ “वेदांग सर्किट” विकसित करने की मांग उठी है। उन्होंने राज्य पर्यटन विभाग से इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया। साथ ही, वाचस्पति डीह के जीर्ण-शीर्ण अवस्था पर चिंता जताते हुए इसके संरक्षण और विकास की मांग की गई।

इस अवसर पर डॉ. विद्यानाथ झा ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से मिथिला के गृह उद्योग में महिलाओं की भूमिका को विस्तार से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के अगले सत्र में संस्कृति और कला पर विचार-विमर्श के साथ मैथिली एवं संस्कृत कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। संध्या काल में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने महोत्सव को जीवंत बनाया।

कार्यक्रम का सफल संचालन राघव झा ने किया। आयोजन में जिला कला पदाधिकारी नीतिश कुमार, धीरज मिश्र एवं संत कुमार की विशेष भूमिका रही।

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