चैत्र नवरात्रि : शक्ति, नववर्ष और श्रीराम जन्म का समन्वित संदेश

लेखक: अवधेश झा भारतीय संस्कृति में चैत्र नवरात्रि साधना का महापर्व, सृष्टि, शक्ति, धर्म और प्रकृति के गहन संबंधों का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व हमें आध्यात्मिक साधना के साथ जीवन के मूल सिद्धांतों—नव आरंभ, आत्मशुद्धि और धर्म की स्थापना—का भी बोध कराता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होने वाला यह नौ दिवसीय उत्सव […]

Continue Reading

Jawara Sprouts in Chaitra Navratri: A Profound Symbol of Life, Nature, and the Cycle of Rebirth

By Kanchan Choudhary Patna | March 19, 2026 II As Chaitra Navratri commenced today with the sacred ritual of Ghatasthapana, devotees across India began sowing barley (jau) seeds in earthen pots—an age-old tradition that marks the beginning of spiritual observance and devotion to Maa Durga. Within a few days, these seeds sprout into tender green […]

Continue Reading

The Hen That Trusted Tomorrow: Russell’s Warning for an Age of Capitalism

By Kuruvilla Pandikattu SJ In a small courtyard, a hen arrives wary and alert. The owner’s footsteps feel like threat. She flinches at shadows, keeps distance, and treats every human approach as danger.Then a different pattern begins. The owner feeds her—once, then again, then daily. Grain appears with clockwork reliability. Water is placed within reach. […]

Continue Reading

महाशिवरात्रि — अज्ञान से ज्ञान की यात्रा

लेखक: अवधेश झा शिवरात्रि महापर्व ज्ञान और अनंत की यात्रा है। यह वह रात्रि है जब मनुष्य बाह्य जगत् के कोलाहल से निवृत्त होकर अपने भीतर के शिवतत्त्व का साक्षात्कार करता है। प्रायः हम शिवरात्रि में व्रत, उपवास, रुद्राभिषेक और रात्रिजागरण तो करते हैं, लेकिन यह शिवदर्शी बनने का भी दिन है। उपनिषदों की वाणी […]

Continue Reading

Spirituality in a VUCA–BANI World: A Common Ground for Ethics, Work, and Politics

Dr. Kuruvilla Pandikattu SJ* Our modern world does not suffer from a lack of information. It suffers from a lack of orientation. Our systems are faster, more interlinked, and more opaque than the moral habits with which we try to manage them. The language of VUCA—volatility, uncertainty, complexity, ambiguity—was popularised to describe precisely this condition: […]

Continue Reading

बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी एंड ऑक्यूपेशनल थेरेपी में मनाया गया सरस्वती पूजा

“उज्ज्वल भविष्य और उत्तम चरित्र निर्माण के लिए मां सरस्वती की आराधना के साथ-साथ एकाग्रचित्त मन से कड़ी मेहनत भी आवश्यक है “- उक्त उद्गार बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी एंड ऑक्यूपेशनल थेरेपी में आयोजित सरस्वती पूजा समारोह में कॉलेज के प्राध्यापक व प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ प्रियदर्शी आलोक ने व्यक्त किए। बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी एवं […]

Continue Reading

भाजपा सरकार पर सनातन परंपराओं के अपमान का आरोप, प्रयागराज माघ मेला में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर विवाद गहराया

कंचन चौधरी प्रयागराज | 21 जनवरी 2026 :: प्रयागराज माघ मेला 2026 के दौरान मौनी अमावस्या (18 जनवरी) को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पालकी को संगम नोज तक जाने से रोके जाने का मामला अब गंभीर राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक विवाद का रूप ले चुका है। घटना के विरोध में शंकराचार्य […]

Continue Reading

अंतरराष्ट्रीय सम्मान से नवाजे गए हैं – बिहार के “पंडित शम्भू नाथ झा”

मानव सेवा, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में अद्वितीय योगदान देने वाले पंडित शम्भू नाथ झा ने न सिर्फ बिहार का बल्कि पूरे भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया है। सामाजिक, रचनात्मक और आध्यात्मिक कार्यों में उनकी निरंतर सक्रियता और उत्कृष्ट सेवाओं के कारण उन्हें भारत के साथ-साथ अजरबैजान, वियतनाम और मलेशिया […]

Continue Reading

आस्था, सेवा और साधना का अद्भुत संगम है – “पंडित शम्भू नाथ झा की आध्यात्मिक यात्रा”

भारत की सांस्कृतिक विरासत में वैदिक मंत्रों का स्थान सदियों से सर्वोच्च रहा है। इन मंत्रों का शुद्ध उच्चारण न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा को जाग्रत करता है, बल्कि वातावरण को भी पवित्रता से भर देता है। इसी परंपरा को जीवंत करते हैं “पंडित श्री शम्भू नाथ झा”। “पंडित शम्भू नाथ झा”, जो वैदिक मंत्रों के […]

Continue Reading

गुरु पूर्णिमा – श्रद्धा, साधना और समर्पण के साथ मनाया “मातृ उद्बोधन आध्यात्मिक केन्द्र”

भारतीय संस्कृति में गुरु को परम स्थान प्राप्त है। वेदों में कहा गया है “गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः”। गुरु न केवल जीवन का मार्गदर्शन करते हैं, बल्कि आत्मा के अंधकार को हटाकर उसे प्रकाश की ओर ले जाते हैं। गुरु पूर्णिमा का पर्व उसी परंपरा का दिव्य प्रतीक है, एक ऐसा दिन […]

Continue Reading