हिन्द चक्र स्वास्थ्य साक्षात्कार : डॉ. डी. पी. सिंह के साथ

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प्रस्तुति – कंचन चौधरी

पटना: आज स्वास्थ्य से जुड़ी एक गंभीर समस्या — हृदयाघात (Heart Attack) — पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हिन्द चक्र संवाददाता, कंचन चौधरी ने राजेन्द्र नगर, पटना स्थित डॉ. डी. पी. सिंह से विशेष बातचीत की।
पाठकों के लिए प्रस्तुत है इस साक्षात्कार के मुख्य अंश —

कंचन चौधरी: भारत में हृदयाघात (Heart Attack) के मामलों की वर्तमान स्थिति क्या है?

डॉ. डी. पी. सिंह: भारत में हृदयाघात से प्रतिदिन लगभग 90 लोगों की मृत्यु होती है। 2024 के आंकड़ों के मुताबिक (अनुमानित) लगभग 36,000 की हृदयाघात से मृत्यु हुई थी, (यह 2023 के अनुमानित 34,000 से अधिक है)। जबकि 2022 में यह अकड़ा 32,457 थी।
वर्ष 2022 से 2024 की आंकड़ों में वृद्धि और हृदयाघात से हुई मृत्यु बेहद चिंताजनक है। इसलिए, सतर्क रहने और दिनचर्या में सुधार की आवश्यकता है।

कंचन चौधरी: क्या हृदयाघात के लिए कोई निश्चित आयु सीमा होती है?

डॉ. डी. पी. सिंह: कोविड-19 महामारी से पहले हृदयाघात सामान्यतः 50 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में देखा जाता था। लेकिन महामारी के बाद यह प्रवृत्ति तेजी से बदली है — अब कम उम्र के लोगों में भी हृदयाघात के मामले बढ़ रहे हैं। इसलिए अब इसकी कोई निश्चित आयु सीमा नहीं रह गई है।

कंचन चौधरी: हृदयाघात के प्रमुख कारण और प्रारंभिक लक्षण क्या हैं?

डॉ. डी. पी. सिंह: हृदयाघात का सबसे सामान्य कारण कोरोनरी धमनी रोग (Coronary Artery Disease – CAD/CHD) है।

मुख्य प्रारंभिक लक्षण:
सीने में दर्द या भारीपन
अत्यधिक पसीना आना
सांस लेने में कठिनाई
बाएं हाथ, गर्दन या जबड़े में दर्द का फैलना
थकान और बेचैनी का अनुभव

इन लक्षणों को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए और तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

कंचन चौधरी: हार्ट अटैक के दौरान हृदय पर क्या जैविक प्रभाव पड़ता है?

डॉ. डी. पी. सिंह: हार्ट अटैक के दौरान आर्टरी वेसल्स (artery vessels) अवरुद्ध (आर्टरी ब्लॉकेज) हो जाती हैं। ये रक्तवाहिनियाँ हृदय तक ऑक्सीजनयुक्त रक्त पहुँचाती हैं। जब इनमें रुकावट या क्षति होती है, तो हृदय की मांसपेशियों में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे हृदय कोशिकाओं की मृत्यु (tissue damage) हो सकती है।

कंचन चौधरी: क्या हमारी दैनिक जीवनशैली का हृदयाघात पर सीधा प्रभाव पड़ता है?

डॉ. डी. पी. सिंह: बिल्कुल। आज की तेज़ रफ्तार और असंतुलित जीवनशैली का हृदय पर सीधा असर पड़ रहा है।

मुख्य कारण:
असंतुलित और तेलयुक्त भोजन
तनाव ग्रस्त रहना (Stress)
अत्यधिक काम और आराम की कमी
धूम्र – पान, नशे आदि का अत्यधिक सेवन
पर्यावरणीय असंतुलन और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव जैसे “हिट वेव” लू और अत्यधिक ठंड का प्रभाव।
अनियमित जीवनशैली एवं जंक फूड का प्रभाव

सावधानियाँ:
तेलयुक्त भोजन कम करें
कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें
फल और हरी सब्जियों का सेवन बढ़ाएँ
नियमित व्यायाम करें
तनाव और नशे से दूर रहें

कंचन चौधरी: क्या दीपावली सौर शराब भी हृदयाघात को प्रभावित करता है?

डॉ. डी. पी. सिंह: मौसम का प्रतिकूल प्रभाव हृदयाघात पर पड़ता है, इसलिए, सावधानी बरतें, दीपावली या अन्य त्योहार – उत्सव में शोर – शराबा, आतिशबाजी , डी. जे. धूम – धड़ाका आदि से बचें। खान – पान का ध्यान रखें।

डॉ. डी. पी. सिंह का संदेश:
“हृदय की सुरक्षा केवल दवाओं से नहीं, बल्कि संतुलित जीवनशैली, सकारात्मक सोच और नियमित स्वास्थ्य जांच से संभव है।”

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