– कंचन चौधरी
नई दिल्ली, 24 नवंबर 2025 — न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सोमवार को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति सूर्यकांत का कार्यकाल करीब 14 महीने, यानी 27 जनवरी 2027 तक रहेगा। सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति 24 मई 2019 को हुई थी। इससे पहले वे पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं और शीर्ष अदालत में वे दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश थे।
राजनीतिक जगत से बधाइयां – शपथ ग्रहण के तुरंत बाद कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पर बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि नए CJI के नेतृत्व में न्यायपालिका में जनविश्वास और मजबूत होगा और लंबित मामलों के समाधान में तेजी आएगी। प्रधानमंत्री, केंद्रीय कानून मंत्री, अटॉर्नी जनरल सहित देशभर की प्रमुख कानूनी हस्तियों ने भी न्यायमूर्ति सूर्यकांत को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
सुप्रीम कोर्ट में इस समय हजारों मामले लंबित हैं। इनमें इलेक्ट्रोरल बॉन्ड, CAA, अनुच्छेद 370, समलैंगिक विवाह मान्यता जैसे कई ऐतिहासिक और संवेदनशील मामले शामिल हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत पहले भी कई महत्वपूर्ण मामलों में अग्रणी भूमिका निभा चुके हैं—अनुच्छेद 370 की निरस्तीकरण को बरकरार रखने वाली पीठ के सदस्य, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अहम फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, न्यायमूर्ति सूर्यकांत का कार्यकाल कम जरूर है, लेकिन उनकी स्पष्टवादिता, संवैधानिक दृष्टि और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए न्यायालय की गति और स्वतंत्रता को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।नए मुख्य न्यायाधीश के कार्यभार संभालते ही देश की निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि आने वाले महीनों में न्यायपालिका में किस तरह के सुधार और फैसले देखने को मिलते हैं।