पटना, 11 दिसंबर 2025 :: बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 41वां पटना पुस्तक मेला पूरे उत्साह और भव्यता के साथ आयोजित किया जा रहा है। सेंटर फॉर रीडरशिप डेवलपमेंट (सीआरडी) द्वारा आयोजित इस प्रतिष्ठित साहित्यिक महोत्सव का उद्घाटन 5 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया। मेला 16 दिसंबर 2025 तक चलेगा।
इस वर्ष मेले की थीम “वेलनेस – ए वे ऑफ लाइफ” रखी गई है, जिसके अंतर्गत साहित्य, स्वास्थ्य, कला और जीवन-दर्शन का सुंदर समन्वय देखने को मिल रहा है।अवधेश प्रीत को समर्पित मेलाइस बार का पटना पुस्तक मेला देश के चर्चित कथाकार अवधेश प्रीत को समर्पित है। मेले में लगभग 200 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें प्रभात प्रकाशन, राजकमल प्रकाशन, वाणी प्रकाशन, भारतीय ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी सहित देश के प्रमुख प्रकाशक शामिल हैं। हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मैथिली सहित कई भारतीय भाषाओं की पुस्तकों की व्यापक श्रृंखला पाठकों को आकर्षित कर रही है।
इसके साथ ही सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की विशेष प्रदर्शनियाँ भी दर्शकों के लिए लगाई गई हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी मेले के दौरान पुस्तकों का अवलोकन किया।15 करोड़ रुपये की पुस्तक ‘मैं’ बनी आकर्षण का केंद्रमेले का सबसे बड़ा आकर्षण दुनिया की सबसे महंगी पुस्तक ‘मैं’ है, जिसे साहित्यकार रत्नेश्वर ने लिखा है। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध इस ग्रंथ की कीमत 15 करोड़ रुपये रखी गई है। इस पुस्तक की केवल तीन प्रतियाँ ही प्रकाशित की गई हैं।
300 से अधिक साहित्यिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमपटना पुस्तक मेले के दौरान 300 से अधिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें मुशायरा, कवि सम्मेलन, “तेरी-मेरी प्रेम कहानी”, “ज्ञान और गुरुकुल”, “संपादक से संवाद”, “युवा स्वर”, स्वास्थ्य संवाद तथा सिनेमा-उनेमा जैसे सत्र शामिल हैं।इन कार्यक्रमों में प्रसिद्ध लेखक नीलोत्पल मृणाल, संजीव पालीवाल, वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय और आलोचक जय प्रकाश पांडेय सहित अनेक साहित्यकार और विचारक भाग ले रहे हैं।कला प्रदर्शनी और लोक संस्कृति की झलकमेले में पद्मश्री सम्मानित कलाकारों की पेंटिंग्स और मूर्तियों की विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई है।
इसके साथ ही बिहार की समृद्ध लोक कला और सांस्कृतिक विरासत का सुंदर प्रदर्शन दर्शकों को खूब लुभा रहा है।भारी भीड़, उत्साहपूर्ण माहौलमेले के छठे दिन गुरुवार दोपहर तक 50 हजार से अधिक पुस्तक प्रेमी गांधी मैदान पहुँच चुके थे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर आयु वर्ग के लोग पुस्तकों की खरीदारी करते और साहित्यिक चर्चाओं में भाग लेते नजर आए।
प्रवेश के लिए गेट नंबर 5, 6 और 10 निर्धारित किए गए हैं। आयोजकों के अनुसार, वीकेंड पर भीड़ और बढ़ने की संभावना है।प्रवेश शुल्क और समयप्रवेश टिकट: ₹20 (सामान्य)विशेष: बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए निःशुल्क प्रवेशसमय: सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तकपिछले 41 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहे पटना पुस्तक मेले ने राजधानी को साहित्य का एक सशक्त केंद्र बना दिया है। “यह मेला केवल किताबों का व्यापार नहीं, बल्कि विचारों का महासागर है, जहाँ समाज और संस्कृति की आत्मा बसती है।”