पटना में आयोजित एक गरिमामय समारोह में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक जितेन्द्र कुमार सिन्हा की दूसरी पुस्तक “कायस्थ विरासत – चित्रगुप्त से चार धाम तक” का विमोचन किया गया। यह केवल एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक परंपरा, धार्मिक चेतना और समाज के बौद्धिक इतिहास को पुनर्स्मरण करने का अवसर भी था। इस आयोजन में कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया।
पटना के पुनाईचक में आयोजित इस कार्यक्रम में मुकेश कुमार सिन्हा (उर्फ मुकेश महान), नीलकमल, दीपक कुमार अभिषेक तथा संजय कुमार सिन्हा ने संयुक्त रूप से पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने लेखक के कार्य की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए उपयोगी और प्रेरणादायक बताया।
जितेन्द्र कुमार सिन्हा न केवल एक पत्रकार हैं, बल्कि एक गंभीर चिंतक और शोधपरक लेखक भी हैं। उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। उनकी पहली पुस्तक “शिव तत्व” भगवान शिव के दार्शनिक और आध्यात्मिक पहलुओं पर आधारित एक शोधपरक कृति है। यह पुस्तक पाठकों के बीच काफी सराही गई। अब उनकी दूसरी पुस्तक “कायस्थ विरासत” ने उनके लेखन को एक नई दिशा दी है।
यह पुस्तक विशेष रूप से कायस्थ समाज, उनके इष्ट देव भगवान चित्रगुप्त और उनसे जुड़े धार्मिक स्थलों पर केंद्रित है। इसमें भगवान चित्रगुप्त का पौराणिक महत्व, कायस्थ समाज की उत्पत्ति और विकास, चित्रगुप्त के प्रमुख धामों का वर्णन, धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं का विश्लेषण एवं ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित शोध विषयों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाजशास्त्र और इतिहास के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
कायस्थ समाज में भगवान चित्रगुप्त को विशेष स्थान प्राप्त है। उन्हें यमराज के लेखाकार के रूप में जाना जाता है, जो मनुष्यों के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। पुस्तक में चित्रगुप्त जी के विभिन्न धामों का उल्लेख करते हुए उनके धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को समझाया गया है। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो इस विषय से अपरिचित हैं।
उक्त अवसर पर मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा कि आज के समय में धर्म और संस्कृति पर गंभीर लेखन की कमी महसूस की जा रही है। ऐसे में इस प्रकार की पुस्तकों का प्रकाशन समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने लेखक की सरल और प्रभावशाली लेखनी की प्रशंसा की।
नीलकमल ने कहा कि लेखक लगातार लेखन के माध्यम से अपनी पहचान बना रहे हैं। यह न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणादायक है।
दीपक कुमार अभिषेक ने पुस्तक को शोधपरक बताते हुए कहा कि यह अन्य पुस्तकों से अलग है क्योंकि इसमें तथ्यों और प्रमाणों का समुचित उपयोग किया गया है।
संजय कुमार सिन्हा ने लेखक को बहुमुखी प्रतिभा का धनी बताते हुए कहा कि उनका लेखन समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर करता है।
“कायस्थ विरासत” केवल एक धार्मिक पुस्तक नहीं है, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता का माध्यम भी है। यह पुस्तक युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ती है। धार्मिक ज्ञान को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है। ऐतिहासिक तथ्यों को प्रमाण सहित समझाती है और समाज में सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देती है।

बक्सर निवासी बाबा धानु पाठक ने कहा है कि धर्म और कर्तव्य को पुस्तकों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना एक श्रेष्ठ कार्य है।
वहीं गौरीचक थाना अंतर्गत जैवर निवासी नरेन्द्र कुमार सिन्हा ने लेखक की प्रशंसा करते हुए कहा कि शोधपरक लेखन करना आसान नहीं होता है और यह पुस्तक उस कठिन कार्य का उत्कृष्ट उदाहरण है।

अरवल स्थित वरिष्ठ पत्रकार एवं IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मोहन कुमार ने पुस्तक “शिव तत्त्व” के संबंध में कहा कि यह पुस्तक पठनीय तो है ही, साथ ही संग्रहणीय भी है। दूसरी पुस्तक “कायस्थ विरासत” के लिए जितेन्द्र कुमार सिन्हा को बधाई देते हुए कहा कि इसमें जो बातें लिखी गई है उससे बहुत से लोग अनभिज्ञ हैं, इसलिए यह पुस्तक पठनीय है।

जितेन्द्र कुमार सिन्हा ने अपने संबोधन में बताया कि उनकी एक पुस्तक “गुप्त महाशक्ति” प्रकाशनाधीन है। बच्चों के लिए एक रोचक पुस्तक भी तैयार हो रही है। राजनीतिक विषयों पर उनकी एक अधूरी पुस्तक भी प्रगति पर है। यह दर्शाता है कि लेखक विभिन्न विषयों पर लगातार कार्य कर रहे हैं।
साहित्य समाज का दर्पण होता है। जब लेखक धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर लिखते हैं, तो वे न केवल ज्ञान का प्रसार करते हैं, बल्कि समाज को उसकी जड़ों से जोड़ते हैं। “कायस्थ विरासत” जैसी पुस्तकें यह सिद्ध करती हैं कि आधुनिक समय में भी परंपरा और संस्कृति का महत्व कम नहीं हुआ है।
“कायस्थ विरासत – चित्रगुप्त से चार धाम तक” एक ऐसी पुस्तक है जो धर्म, इतिहास और समाज को एक साथ जोड़ती है। यह न केवल कायस्थ समाज के लिए, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है जो भारतीय संस्कृति और परंपरा को समझना चाहता है। जितेन्द्र कुमार सिन्हा का यह प्रयास सराहनीय है और यह उम्मीद की जा सकती है कि वे भविष्य में भी इसी प्रकार समाज को ज्ञान और प्रेरणा देने वाली रचनाएँ प्रस्तुत करते रहेंगे।