पटना : बिहार की सांस्कृतिक धरती के लिए गर्व का क्षण है कि प्रख्यात सरोद वादक एवं पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना के संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रीता दास को बिहार सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2022-23 के लिए वाद्य वादन के क्षेत्र में ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ सम्मान’ (स्थापित श्रेणी) प्रदान करने की घोषणा की गई है।
प्रो. रीता दास बिहार की पहली महिला सरोद कलाकार हैं। वे मैहर सेनिया परंपरा की प्रतिनिधि हैं और आकाशवाणी दिल्ली की ‘ए’ ग्रेड कलाकार भी हैं। इन्होंने देश-विदेश के कई मंचों पर अपने सरोद वादन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया और बिहार, विशेषकर मिथिला की सांस्कृतिक गरिमा को नई पहचान दी।
मधुबनी जिले के एक प्रतिष्ठित परिवार में जन्मी प्रो. रीता दास को संगीत और साहित्य की विरासत परिवार से ही मिली। इनके पिता प्रो. चंद्रकांत लाल दास पटना के कॉमर्स कॉलेज में अंग्रेज़ी विभागाध्यक्ष एवं जाने-माने सरोद वादक थे, जबकि माता श्रीमती सावित्री देवी आकाशवाणी पटना के मैथिली नाटक की पहली महिला कलाकार थीं।
प्रो. रीता दास ने सरोद वादन की शिक्षा गुरू-शिष्य परंपरा में अपने पिता से प्राप्त की तथा बाद में मैहर घराने के उस्ताद आशीष ख़ाँ की शिष्या बनीं। उन्हें उस्ताद बहादुर ख़ाँ, पं. विमलेंदु मुखर्जी और पं. सुनील मुखर्जी से भी मार्गदर्शन मिला। उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से मास्टर्स, दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.फिल तथा पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है।
देश के कई प्रमुख सांस्कृतिक नगरों—दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, ग्वालियर, पटियाला, गुवाहाटी, गोवा आदि में उनके सरोद वादन की ध्वनि गूँज चुकी है। वे आकाशवाणी व दूरदर्शन पर कई बार प्रस्तुतियाँ दे चुकी हैं और दिग्गज कला विदुषी डॉ. कपिला वात्स्यायन के साथ मंच साझा कर चुकी हैं।
प्रो. रीता न केवल सरोद वादन में दक्ष हैं बल्कि उन्होंने ध्रुपद गायन की शिक्षा भी प्राप्त की है और पं. रामचतुर मल्लिक की गंडाबंध शिष्या हैं। उनके निर्देशन में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय से निकल रही युवा पीढ़ी शास्त्रीय संगीत की नई परंपराएँ गढ़ रही है।
बिहार की बेटी और असाधारण प्रतिभा की धनी प्रो. रीता दास को यह सम्मान मिलना निश्चित ही राज्य और देश की सांगीतिक धरोहर के लिए गौरव का विषय है।