आत्मा की शाश्वतता का ज्ञान ही गीता का मुख्य ध्येय है

लेखक: अवधेश झा भारतीय चिंतन परम्परा में श्रीमद्भगवद्गीता एक प्रसाद-ग्रन्थ है और जीवन के गहरे प्रश्नों का शाश्वत उत्तर है। यह मनुष्य के भीतर सोई हुई दिव्यता को जगाती है और उसे बताती है कि उसका वास्तविक स्वरूप शरीर-इंद्रियों का नहीं, बल्कि शुद्ध, नित्य, सर्वव्यापी आत्मा का है। इसी सत्य को रेखांकित करते हुए जस्टिस […]

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