नारी का आत्मसम्मान
अमृता राज लड़की हो तुम, थोड़ा लिहाज़ करो —बचपन से यही आवाज़ सुनती आई हूँ।अपने सपनों को चुपके से दिल में दबाकर,दूसरों की ख़ुशी में ही मुस्कुराती आई हूँ।आँसू भी पोंछे हैं हँसकर कई बार,ताकि “लोग क्या कहेंगे” ये सवाल ना उठे हर बार। कभी बेटी, कभी बहू, कभी पत्नी का नाम मिला,पर मेरा अपना […]
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