एम्स, नई दिल्ली में ‘NCAHRS-2026’ का हुआ सफल आयोजन – “स्वास्थ्य एवं पुनर्वास क्षेत्र को मिली नई दिशा”

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नई दिल्ली स्थित All India Institute of Medical Sciences (एम्स) में शनिवार और रविवार को आयोजित “नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एडवांस हेल्थकेयर एंड रिहैबिलिटेशन साइंसेज” (NCAHRS-2026) सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। देश के इस प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में आयोजित यह सम्मेलन स्वास्थ्य एवं पुनर्वास क्षेत्र के विशेषज्ञों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा, जहां ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार का व्यापक आदान-प्रदान हुआ।

इस सम्मेलन का आयोजन एम्स के ‘डिपार्टमेंट ऑफ जेरियाट्रिक मेडिसिन’ एवं ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस वर्ष की थीम थी “Redefining Multidisciplinary Care: Evidence-Based Approaches for Advanced Health Care”, जिसका उद्देश्य बहु-विषयक स्वास्थ्य सेवाओं को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर और अधिक प्रभावी बनाना था।

इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसमें फिजियोथेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट, डाइटीशियन, मनोवैज्ञानिक, स्पीच थेरेपिस्ट, विशेष शिक्षक और प्रोस्थेटिक्स-ऑर्थोटिक्स विशेषज्ञ शामिल रहे। इस विविधता ने सम्मेलन को बहुआयामी दृष्टिकोण प्रदान किया। सम्मेलन के दौरान शोध पत्र (Research Papers) एवं पोस्टर प्रस्तुतिकरण हुए, जिनमें नई तकनीकों, उपचार पद्धतियों और पुनर्वास के आधुनिक दृष्टिकोणों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त इंटरएक्टिव वर्कशॉप्स, इंटर-कॉलेज क्विज प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिससे प्रतिभागियों को सीखने के साथ-साथ संवाद और सहभागिता का अवसर मिला।

सम्मेलन में बाल चिकित्सा से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति Dr. Ganesh B. Tajane द्वारा दी गई, जिसमें उन्होंने “पेडियाट्रिक ऑक्यूपेशनल थेरेपी में विज़ुअल परसेप्शन” विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बच्चों के सीखने, लिखने और दैनिक गतिविधियों में विजुअल परसेप्शन की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने विजुअल डिस्क्रिमिनेशन, स्पेशियल रिलेशन और फिगर-ग्राउंड परसेप्शन जैसे कौशलों को विस्तार से समझाया और यह भी बताया कि इन क्षमताओं की प्रारंभिक पहचान और समय पर हस्तक्षेप बच्चों के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। उनकी प्रस्तुति ने बाल पुनर्वास के क्षेत्र में नई समझ विकसित की।

सम्मेलन में Prof. (Dr.) Anand Mishra द्वारा “भारत में प्राचीन से आधुनिक फिजियोथेरेपी का विकास” विषय पर व्याख्यान विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद, योग और पारंपरिक उपचार पद्धतियाँ फिजियोथेरेपी की आधारशिला रही हैं। उन्होंने आधुनिक युग में तकनीक, अनुसंधान और पुनर्वास विज्ञान के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि आज फिजियोथेरेपी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। उनका यह व्याख्यान फिजियोथेरेपी के समग्र विकास की झलक प्रस्तुत करता है।

वर्कशॉप सत्रों में Dr. Gaurav Chawla द्वारा “मायोफेशियल मेरिडियन्स बैलेंसिंग और असेसमेंट” विषय पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने शरीर के मायोफेशियल नेटवर्क और मूवमेंट पैटर्न के बीच संबंध को विस्तार से समझाया। प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन प्रैक्टिस के माध्यम से विभिन्न असेसमेंट तकनीकों और उपचार पद्धतियों का अनुभव कराया गया। यह सत्र विशेष रूप से मैनुअल थेरेपिस्ट्स के लिए अत्यंत उपयोगी रहा और उनकी क्लिनिकल दक्षता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुआ।

सम्मेलन के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इसी क्रम में बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी एंड ऑक्यूपेशनल थेरेपी, पटना के सह प्राध्यापक Dr. Abhay Kumar Jaiswal को उनके दीर्घकालिक योगदान, समर्पण और निष्काम सेवा के लिए Lifetime Achievement Award से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त Dr. Parmanand Singh, Dr. Sujit Kumar, Dr. Lili Farhad Parveen एवं Raman Kumar Singh को भी विभिन्न चिकित्सा सम्मानों से नवाजा गया।

सम्मेलन की सफलता में कई विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। Dr. Priyadarshi Alok ने डॉ. जायसवाल की उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण बताया। वहीं Dr. Avinash Dharagave एवं Dr. Prabhat Ranjan ने आयोजन सचिव के रूप में कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसके साथ ही Dr. Navneet Wig और Dr. Avinash Chakravarty ने पैट्रन के रूप में मार्गदर्शन प्रदान किया।

NCAHRS-2026 सम्मेलन स्वास्थ्य एवं पुनर्वास क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ। इसने न केवल विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान किया, बल्कि उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के विकास के लिए नई संभावनाओं के द्वार भी खोले। सम्मेलन के सफल आयोजन से यह स्पष्ट है कि भविष्य में इस प्रकार के बहु-विषयक कार्यक्रम स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ और वैज्ञानिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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