बिहार की डॉ. रीता दास और कोलकाता के सुरजीत मुखर्जी ने राग कौशी कान्हड़ा से दी संगीतांजलि
पटना: नाद विस्तार की ओर से महान ध्रुपद गायक पद्मश्री पंडित सियाराम तिवारी की पुण्यतिथि के अवसर पर ध्रुपद संध्या एवं स्मृति समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बिहार की प्रख्यात सरोद कलाकार डॉ. रीता दास ने राग कौशी कान्हड़ा प्रस्तुत कर पंडित सियाराम तिवारी को भावपूर्ण संगीतांजलि अर्पित की।
मैहर सेनिया घराने की प्रतिनिधि कलाकार डॉ. रीता दास ने सरोद की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता एवं गुरु प्रो. सी. एल. दास से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने उस्ताद आशीष खाँ, पं. विमलेंदु मुखर्जी एवं पं. सुनील मुखर्जी से मार्गदर्शन प्राप्त किया। वे भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की इंपैनल्ड कलाकार तथा आकाशवाणी, दिल्ली की ए-ग्रेड कलाकार हैं। उन्होंने अपने कार्यक्रम का समापन राग माझ खम्माज से किया। उनके साथ कोलकाता से आए पं. शंकर घोष के शिष्य सुरजीत मुखर्जी ने प्रभावशाली एवं सटीक तबला संगति की।
कार्यक्रम का शुभारंभ युवा ध्रुपद गायक वंश प्रभात ने राग मियाँ मल्हार की प्रस्तुति से किया। वहीं कार्यक्रम का समापन राजेंद्र सिजुआर के राग मेघ की प्रस्तुति से हुआ।
इस अवसर पर नाद विस्तार की ओर से वरिष्ठ कथक गुरु डॉ. रमा दास को पद्मश्री पंडित सियाराम तिवारी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन नम्रता कुमारी ने किया। संस्था की सचिव आशा पाठक ने कहा कि पंडित सियाराम तिवारी की संगीत साधना और विरासत को जीवित रखने तथा नई पीढ़ी तक उनकी कला-परंपरा को पहुँचाने के उद्देश्य से यह स्मृति समारोह प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाता है।
पद्मश्री पंडित सियाराम तिवारी स्मृति समारोह में डॉ. रीता दास के सरोद वादन ने श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित किया। तबले पर कोलकाता के श्री सुरजीत मुखर्जी ने संगति की।