भारत मंडपम में बिहार के प्रतिभाओं को मिला राष्ट्रीय सम्मान

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देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम 3 अक्टूबर 2026 को बिहार की प्रतिभाओं की उपलब्धियों का साक्षी बना। यहां आयोजित भव्य Iconic Peace & Achievers Award 2026 समारोह में बिहार की चिकित्सा, फिजियोथेरापी, ऑक्यूपेशनल थेरापी एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई शिक्षकों एवं विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया। समारोह में बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरापी एंड ऑक्यूपेशनल थेरापी, पटना तथा श्री अरविन्द महिला कॉलेज, पटना से जुड़े शिक्षाविदों को विभिन्न प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया।

भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों से संबद्ध/मान्यता प्राप्त संस्थाओं के रूप में आयोजकों द्वारा प्रस्तुत Iconic Peace Award Council एवं Emerging Achievers Award Council, नई दिल्ली की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली प्रतिभाओं को पहचान देना रहा। आयोजकों ने इसे अपने मिशन ‘Celebrate Greatness’ के तहत आयोजित किया।

समारोह में बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरापी एंड ऑक्यूपेशनल थेरापी, पटना के सह-प्राध्यापक डॉ. अभय कुमार जायसवाल को Ashoka Award से सम्मानित किया गया। वहीं संस्थान से जुड़े डॉ. प्रियदर्शी आलोक, विभागाध्यक्ष सह नियंत्रण पदाधिकारी, डॉ. उदय कुमार, सहायक प्राध्यापक, डॉ. मनोज कुमार, विभागाध्यक्ष, फिजियोथेरापी विभाग तथा डॉ. उमेश कुमार, शैक्षणिक प्रभारी को Honorary Doctorate Award प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त श्री अरविन्द महिला कॉलेज, पटना की सहायक प्राध्यापक डॉ. विभा कृति को भी Honorary Doctorate Award से सम्मानित किया गया।
सम्मान समारोह में डॉ. अभय कुमार जायसवाल की उपलब्धि विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। उन्हें इससे पहले 22 अगस्त 2026 को भी Honorary Doctorate Award से सम्मानित किए जाने की जानकारी दी गई है। अब भारत मंडपम में आयोजित समारोह में उन्हें Ashoka Award प्रदान किया गया। उनकी उपलब्धियों को फिजियोथेरापी एवं ऑक्यूपेशनल थेरापी के क्षेत्र में कार्य, दिव्यांगजनों की सेवा, कठिन परिश्रम और गुणवत्तापूर्ण योगदान से जोड़कर देखा गया। यह सम्मान चिकित्सा शिक्षा एवं पुनर्वास सेवाओं से जुड़े क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आयोजकों के अनुसार सम्मान के लिए प्रतिभाओं का चयन चरणबद्ध और निर्धारित मापदंडों के आधार पर किया गया। संबंधित व्यक्तियों के कार्य, सामाजिक योगदान, अपने पेशे के प्रति समर्पण तथा समाज के लिए किए गए प्रयासों को चयन प्रक्रिया में महत्व दिया गया। कार्यक्रम में यह संदेश भी प्रमुखता से सामने आया कि समाज में ऐसे अनेक लोग हैं, जो बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के अपने पेशे और समाज के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। ऐसे लोगों की उपलब्धियों को सामने लाना और उन्हें सार्वजनिक पहचान देना भी समाज के लिए प्रेरणादायक है।

बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरापी एंड ऑक्यूपेशनल थेरापी, पटना और श्री अरविन्द महिला कॉलेज, पटना से जुड़े शिक्षकों एवं विशेषज्ञों को राष्ट्रीय राजधानी में सम्मान मिलने से दोनों संस्थानों में भी खुशी का माहौल है। संस्थान के पदाधिकारियों, कर्मचारियों, शुभचिंतकों, परिजनों, मित्रों और समाज के लोगों ने सम्मानित प्रतिभाओं को बधाई देते हुए इसे बिहार और संबंधित संस्थानों के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन संस्थानों की शैक्षणिक और सामाजिक भूमिका को भी रेखांकित करता है, जहां से ये प्रतिभाएं जुड़ी हुई है।

समारोह का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान केवल उसकी प्रसिद्धि से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से बनती है। चिकित्सा, पुनर्वास और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में लंबे समय तक निष्ठा के साथ काम करने वाले लोगों का योगदान समाज के लिए स्थायी महत्व रखता है। भारत मंडपम में बिहार की इन प्रतिभाओं का सम्मान इस बात का उदाहरण बना कि मेहनत, सेवा, ज्ञान और समर्पण की पहचान सीमाओं से परे जाकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकती है। यह उपलब्धि बिहार के युवाओं और शिक्षा एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के लिए भी प्रेरणा का संदेश देती है कि अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी और उत्कृष्टता के साथ किया गया प्रयास अंततः सम्मान और पहचान का मार्ग प्रशस्त करता है।

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