पटना में भू-माफिया का आतंक – धमकी, दबाव और पिस्टल की नोक पर कब्जा का प्रयास

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राजधानी पटना में भूमि विवाद और असामाजिक तत्वों के बढ़ते दुस्साहस ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आम नागरिक अब सुरक्षित हैं? क्या कानून का डर खत्म हो गया है? राजीव नगर थाना अंतर्गत चंद्र विहार कॉलोनी में हुई एक ताजा घटना ने न सिर्फ प्रशासन की निष्क्रियता को उजागर किया है, बल्कि सत्ता से जुड़े नामों के दुरुपयोग की भी पोल खोल दी है।

घटना 1 अगस्त 2025 की देर रात लगभग 9.30 बजे की है, जब मोहन कुमार नामक व्यक्ति अपने परिवार और कुछ मित्रों के साथ चंद्र विहार कॉलोनी, रोड नंबर-3 स्थित अपने प्लॉट (K-3) पर मौजूद थे। तभी लगभग 10-12 की संख्या में कुछ लोग वहां पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए चिल्लाने लगे, “तुम लोग कौन हो और यहां कैसे आ गए?” जब मोहन कुमार ने उनसे परिचय पूछा, तो उनमें से एक ने खुद को रविंद्र कुमार बताया और कहा कि वह विधान पार्षद संजय गांधी का भाई है।

उनका दुस्साहस यहीं नहीं रुका। उन्होंने खुलेआम यह दावा किया कि “हम लोग जिस जमीन पर पैर रख देते हैं, वह हमारी हो जाती है।” इसके साथ ही उन्होंने धमकी दी कि थाना से लेकर ऊपर तक सभी अधिकारियों को फोन कर दिया गया है और यदि मोहन कुमार और उनके साथी वहां से नहीं हटे तो उन्हें जिंदा जला दिया जाएगा। इस दौरान उन हमलावरों के हाथों में पिस्टल भी था, जिससे पूरे घटनाक्रम की गंभीरता और बढ़ गई।

घबराए हुए मोहन कुमार ने तुरंत थाना अध्यक्ष को फोन किया।थाना अध्यक्ष ने कहा कि हम देखते हैं “आप लोग हट जाइए, सुबह 11 बजे मिलिए।” यह प्रशासनिक प्रतिक्रिया उस समय दी गई जब सामने पिस्टल लहराते असामाजिक तत्व जान से मारने की धमकी दे रहे थे।

यह घटना पहली बार नहीं हुई है। मोहन कुमार द्वारा बताया गया कि पूर्व में भी उनके प्लॉट पर कब्जे की कोशिश की गई थी, जिसकी शिकायत थाना और 112 पर की गई थी। उस समय भी जांच हुई थी और वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं, जो उन्होंने संलग्न किए हैं।

इस घटना से दो बातें स्पष्ट होती हैं कि एक, अपराधियों में कानून का कोई भय नहीं रह गया है, और दो, सत्ता से जुड़े नामों का इस्तेमाल कर वे खुलेआम धमकियां दे रहे हैं। यदि आम नागरिक को उसकी जमीन पर खड़ा होना भी खतरे से खाली नहीं है, तो यह लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है।

मोहन कुमार ने थाना अध्यक्ष को लिखित रूप से शिकायत की है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की माँग की है। अब यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और आम नागरिक के विश्वास को बहाल करे।

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