भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव को पूरे देश में श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव से मनाया जाता है। इसी क्रम में पटना के लक्ष्मी नारायण काली मंदिर, कलेक्ट्रिएट घाट, गेट नं. 5 से एक भव्य “श्री श्री रोमनी शोभा यात्रा” का आयोजन किया गया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि समाज में एकता और सेवा भाव का संदेश भी दिया।
इस शोभा यात्रा का आयोजन मंदिर के महंत एवं व्यवस्थापक श्री हठयोगी बर्फानी दास के नेतृत्व में किया गया। शोभा यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिसमें महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे सभी शामिल हुए। यात्रा के दौरान भक्तगण भगवान श्रीराम के जयकारे लगाते हुए, भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़ रहे थे। पूरा वातावरण “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा, जिससे पटना शहर का यह क्षेत्र पूरी तरह से भक्तिमय हो गया।
शोभा यात्रा के अवसर पर महंत श्री हठयोगी बर्फानी दास द्वारा एक विशेष और अनोखी पूजा का आयोजन किया गया। उन्होंने मां गंगा के सूखे स्थल पर पूजा-अर्चना की, जो अपने आप में एक अद्भुत दृश्य था। इस पूजा में उन्होंने अपने चारों ओर गोइठा (उपले) से घेरा बनाकर उसमें अग्नि प्रज्ज्वलित की और स्वयं अपने सिर पर एक पात्र में अग्नि धारण कर साधना की। यह दृश्य उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए आश्चर्य और श्रद्धा का केंद्र बना रहा। इस प्रकार की तपस्या और भक्ति ने सभी के मन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया।
पूजा-अर्चना के उपरांत मंदिर परिसर में संध्या आरती का आयोजन किया गया। आरती के दौरान पूरा वातावरण दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चार से आलोकित हो उठा। भक्तजन हाथों में दीप लिए भगवान की आराधना में लीन दिखे। आरती के समय का यह दृश्य अत्यंत मनमोहक और आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करने वाला था, जिसने सभी को भक्ति के रंग में रंग दिया।

संध्या आरती के पश्चात भंडारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। महिलाओं और पुरुषों की भारी उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी सफल बनाया। सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप भोजन वितरित किया गया। भंडारा न केवल धार्मिक आयोजन का हिस्सा था, बल्कि यह सेवा और समर्पण की भावना का प्रतीक भी बना।
इस आयोजन में समाज के कई प्रतिष्ठित लोग भी शामिल हुए। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. आर. के. गुप्ता और राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के बिहार प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार सिन्हा की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। इन गणमान्य व्यक्तियों ने इस प्रकार के धार्मिक और सामाजिक आयोजनों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संदेश फैलाते हैं।
रामनवमी जैसे पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं होते हैं, बल्कि यह समाज में एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक विरासत को भी सुदृढ़ करते हैं। पटना में आयोजित इस शोभा यात्रा और भंडारे ने यह संदेश दिया कि जब समाज एक साथ मिलकर ऐसे आयोजनों में भाग लेता है, तो आपसी संबंध मजबूत होते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव आता है।
पटना के लक्ष्मी नारायण काली मंदिर, कलेक्ट्रिएट घाट पर आयोजित यह रामनवमी उत्सव भक्ति, आस्था और सेवा का एक अनूठा उदाहरण बनकर सामने आया। महंत श्री हठयोगी बर्फानी दास के नेतृत्व में हुए इस आयोजन ने न केवल धार्मिक भावनाओं को प्रबल किया, बल्कि समाज में सेवा, समर्पण और एकता का संदेश भी प्रसारित किया।