भोजपुर में पेंशनर्स एसोसियेशन का छठा जिला सम्मेलन संपन्न – जुटे पेंशनरों ने उठाए अधिकार और भविष्य के सवाल

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भोजपुर जिला मुख्यालय आरा के विद्या भवन सभागार में पेंशनर्स एसोसियेशन जिला शाखा भोजपुर का छठवाँ जिला सम्मेलन बड़े उत्साह और गरिमामय वातावरण में रविवार को आयोजित किया गया। सम्मेलन केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह पेंशनरों की समस्याओं, अधिकारों और भविष्य की चुनौतियों पर गंभीर चिंतन का महत्वपूर्ण मंच भी बना। सम्मेलन में बिहार के विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पेंशनरों ने भाग लेकर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान पेंशन व्यवस्था में हुए बदलाव, अंशदायी पेंशन प्रणाली, आठवें वेतन आयोग तथा पेंशन कानून से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही संगठन के नए पदाधिकारियों का सर्वसम्मति से चयन भी किया गया।

सम्मेलन के खुले सत्र का उद्घाटन अखिल भारतीय पेंशनर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा बिहार पेंशनर्स एसोसियेशन के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र चौधरी ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में पेंशनरों की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारी समाज की अमूल्य पूंजी होते हैं और उनके हितों की रक्षा सरकार की जिम्मेदारी है।

प्रतिनिधि सत्र का उद्घाटन अखिल भारतीय पेंशनर्स एसोसियेशन के सचिव तथा पेंशनर्स एसोसियेशन पटना के महामंत्री श्री रामेश्वर सिंह ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में जनवादी लेखक संघ बिहार के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री नीरज सिंह उपस्थित रहे। इसके अलावा मुख्य अतिथि के रूप में अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ बिहार के महामंत्री श्री सुबेश सिंह मौजूद रहे। सम्मेलन में कई वरिष्ठ पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने केंद्र सरकार की पेंशन नीतियों पर चिंता व्यक्त की। बताया गया कि एनडीए सरकार के सत्ता में आने के बाद दिसंबर 2004 में एक आदेश जारी किया गया, जिसके माध्यम से जनवरी 2004 से नई अंशदायी पेंशन योजना को वैधानिक रूप दिया गया। इसके बाद कई राज्य सरकारों ने भी इसका अनुसरण किया। वक्ताओं ने कहा कि पुरानी पेंशन व्यवस्था सामाजिक सुरक्षा का आधार थी, जबकि नई अंशदायी प्रणाली में कर्मचारियों की भविष्य की आर्थिक स्थिरता को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है।

सम्मेलन में यह भी कहा गया कि इस बदलाव के कारण पेंशनरों के बीच दो वर्ग बन गए हैं। एक ओर वे लोग हैं जो एक निश्चित तिथि से पहले सेवानिवृत्त हुए और दूसरी ओर वे कर्मचारी जो बाद में सेवा निवृत्त हुए। इससे समानता और न्याय के सिद्धांत पर प्रश्न खड़े होते हैं।

सम्मेलन में आठवें केंद्रीय वेतन आयोग पर भी विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि जनवरी 2025 में केंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग का गठन किया तथा 28 अक्टूबर 2025 को उसके संदर्भ बिंदुओं को स्वीकृति दी गई। संगठन के अनुसार आयोग के एक महत्वपूर्ण प्रावधान में गैर अंशदायी पेंशन योजनाओं की लागत को गैर वित्तपोषित बताया गया है। पेंशनरों का मानना है कि यह दृष्टिकोण उनके हितों के अनुकूल नहीं है।

चर्चा के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया कि 1 जनवरी 2026 से पहले और उसके बाद सेवानिवृत्त होने वाले पेंशनरों के लाभों में अंतर किया गया है। संगठन ने इसे असमानता की स्थिति बताया और सरकार से इस विषय पर पुनर्विचार करने की मांग की।

सम्मेलन में यह भी बताया गया कि सरकार द्वारा पेंशन कानून में जो वैलिडेशन एक्ट जोड़ा गया है, उसके खिलाफ संगठन लगातार संघर्ष कर रहा है। इसी क्रम में 17 दिसंबर 2025 को राज्यपाल के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम एक मांग पत्र सौंपा गया था। संगठन के नेताओं ने कहा कि यह संघर्ष केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि पेंशनरों के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा प्रश्न है।

वक्ताओं ने दावा किया है कि संगठन की एकजुटता और संघर्ष का ही परिणाम रहा कि सरकार को आठवें वेतन आयोग के संदर्भ में राज्य पेंशनर्स एसोसियेशन से सुझाव मांगने पड़े। संगठन ने अपने सुझाव सरकार को सौंप दिए हैं और उन्हें उम्मीद है कि सरकार इस पर सकारात्मक निर्णय लेगी।

सम्मेलन में संगठन की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि बिहार पेंशनर्स एसोसियेशन और संबंधित संगठनों के प्रयासों से 1 जनवरी 2016 से पूर्व के पेंशनरों को वन रैंक वन पेंशन का लाभ प्राप्त हुआ। यह लाभ विभागीय पत्रांक 755 दिनांक 20 जनवरी 2017 के माध्यम से लागू किया गया था। वक्ताओं ने कहा कि यह सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं है बल्कि सामूहिक संघर्ष और संगठन की शक्ति की जीत थी। उन्होंने उपस्थित सदस्यों से संगठन को और मजबूत बनाने तथा अधिक से अधिक पेंशनरों को जोड़ने का आह्वान किया।

सम्मेलन के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में नई जिला कार्यकारिणी का गठन भी किया गया। प्रस्तावित पैनल के माध्यम से सर्वसम्मति से पदाधिकारियों का चयन किया गया।

मुख्य संरक्षक के रूप में श्री रजनीकांत कुशवाहा और श्री भरत जी वर्मा को जिम्मेदारी दी गई। सम्मानित अध्यक्ष के रूप में आनंद मोहन सिन्हा और रामसुन्दर दूबे चुने गए।

जिला अध्यक्ष पद पर श्री रामेश्वर सिंह निर्वाचित हुए, जबकि जिला मंत्री की जिम्मेदारी श्री वैद्यनाथ सिंह को सौंपी गई। सहायक जिला मंत्री के रूप में भगवान सिंह प्रसाद चुने गए। इसके अतिरिक्त वित्त सचिव, कार्यकारी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और संयुक्त मंत्रियों सहित अनेक पदों पर सर्वसम्मति से चुनाव संपन्न हुआ।

सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में पेंशनरों की समस्याएं केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं हैं। महंगाई, चिकित्सा सुविधाएं, सामाजिक सुरक्षा तथा बदलती सरकारी नीतियां भी गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं। ऐसे समय में मजबूत संगठन ही पेंशनरों की आवाज को प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंचा सकता है। भोजपुर का यह सम्मेलन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राष्ट्रीय पत्रकार सुरछा आयोग के बिहार प्रदेश अध्यक्ष-सह-सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग से सेवा निवृत्त हुए जितेन्द्र कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि भोजपुर में आयोजित पेंशनर्स एसोसियेशन का छठवाँ जिला सम्मेलन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था बल्कि यह पेंशनरों के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई का महत्वपूर्ण पड़ाव बनकर सामने आया। सम्मेलन ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि संगठन मजबूत हो और सदस्य एकजुट रहें, तो नीतिगत स्तर पर भी बदलाव संभव है। पेंशनरों की यह एकता आने वाले समय में उनकी आवाज को और अधिक प्रभावी बनाएगी तथा उनके अधिकारों की रक्षा के लिए नए संघर्षों का आधार तैयार करेगी।

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