अंकित कुमार बने डीएसपी, जहानाबाद का बढ़ाया मान

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बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के परिणामों में जहानाबाद जिले के मखदुमपुर प्रखंड अंतर्गत मकरपुर गांव के निवासी अंकित कुमार ने 274वां स्थान प्राप्त कर जिले का नाम गौरवान्वित किया है। उन्हें बिहार पुलिस सेवा में डीएसपी (उप पुलिस अधीक्षक) पद के लिए चयनित किया गया है। यह उपलब्धि केवल एक परीक्षा में सफलता नहीं है, बल्कि संघर्ष, त्याग और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक कहानी है।

अंकित कुमार का जीवन शुरू से ही चुनौतियों से भरा रहा है। बचपन में ही उग्रवादियों द्वारा उनके पिता स्वर्गीय रजनीश शर्मा की हत्या कर दी गई थी। इस दुखद घटना ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया। लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनकी माता सुनीता देवी और चाचा नीरज कुमार ने हार नहीं मानी। चाचा नीरज कुमार ने अंकित की शिक्षा और भविष्य को संवारने का जिम्मा उठाया और उन्हें गांव से बाहर गया में बेहतर शिक्षा दिलाने की व्यवस्था की।

अंकित बचपन से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने गया स्थित डीएवी विद्यालय से वर्ष 2018 में मैट्रिक परीक्षा उत्कृष्ट अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके बाद मॉडर्न एकेडमी, गया से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर उन्होंने पहले ही प्रयास में जेईई परीक्षा सफलतापूर्वक पास की और प्रतिष्ठित आईआईटी वाराणसी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। वर्ष 2024 में उन्होंने अभियंत्रण स्नातक की डिग्री प्राप्त की।

आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद अंकित के सामने कई बड़ी कंपनियों में नौकरी के अवसर मौजूद थे। लेकिन उन्होंने निजी क्षेत्र की आकर्षक नौकरियों को स्वीकार करने के बजाय प्रशासनिक सेवा में जाने का निर्णय लिया। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की तैयारी शुरू की और पूरी लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे।

अंकित कुमार ने अपनी अथक मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर बीपीएससी की 70वीं परीक्षा में पहले ही प्रयास में 274वां स्थान प्राप्त किया। डीएसपी पद पर उनका चयन न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे जहानाबाद जिले के लिए गर्व का विषय बन गया है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति की मंजिल तय नहीं करती, बल्कि उसका संघर्ष और संकल्प उसे सफलता के शिखर तक पहुंचाता है।

अपनी सफलता पर अंकित कुमार ने कहा कि उनकी मंजिल अभी समाप्त नहीं हुई है। वे देश, राज्य, परिवार और समाज के उत्थान के लिए और भी बड़ा योगदान देना चाहते हैं। उनका सपना अपने दिवंगत पिता, माता और चाचा के सपनों को साकार करना है। अंकित की यह उपलब्धि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।

अंकित कुमार की सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और परिवार का सहयोग मिले, तो कोई भी बाधा सफलता के मार्ग में रुकावट नहीं बन सकती।

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