दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के परिप्रेक्ष्य में ‘महत्वपूर्ण पत्रों, परिपत्रों एवं आदेशों के संकलन’ का विमोचन किया गया

अवधेश झा पटना, 13 अप्रैल 2021:: राज्य आयुक्त नि:शक्तता कार्यालय के द्वारा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के परिप्रेक्ष्य में ‘महत्वपूर्ण पत्रों, परिपत्रों एवं आदेशों के संकलन ‘का विमोचन किया गया समाज कल्याण विभाग पटना के द्वारा राज आयुक्त नि:शक्तता, डॉ शिवाजी कुमार द्वारा संपादित इस संकलन का विमोचन सुबह 11:00 बजे ऑनलाइन के माध्यम से […]

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Governing Delhi Needs to upholding federalism- -not rectify it.

By – lovely Singh By cutting off Delhi’ Government’s executive arm, the central govt. has introduced “The government of National capital territory of Delhi Amendment Bill,2021 in a parliament ,granting the lieutenant Governor an extensive power to intervene in the functions of elected government is really a regressive move .With the passing and implementation of […]

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A RETROGRADE STEP OVER RESERVATION

By – lovely singh Hariyana govt.’s decision to reserve 75% for locals in private sector job is a retrograde development. To gain toeholding among young voters,The  Hariyana government has approved “The state Employment of local Act 2020 “on 2nd March this year, which acts as a catalyse of balkinasation of India’s labour Market.Hariyana’s decision to […]

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वायुमंडल में तापमान बढ़ने और नमी के मिलने से आंधी-तूफान के साथ बिजली गिरने की सम्भावना बढ़ी

जितेन्द्र कुमार सिन्हा पटना, 07 मार्च :: मौसम विभाग की पूर्वानुमान के अनुसार, इस सीजन में थंडरस्टॉर्म हर बार से थोड़ी ज्यादा सक्रीय रहेगा। राज्य के दक्षिणी भाग में पूर्वा हवा का प्रभाव अगले 24 घंटों में बढ़ेने की सम्भावना है। ऐसी स्थिति में नमी का प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि […]

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योग बसंत

अवधेश झा वसुधा में संचित उद्दीप्त यौवन,अष्ट-वायु से सुगन्धित अंतः मन।आनंद ह्रदय के कुंड श्रोत से,प्रकृति आभूषित आत्म उपवन।। भाव समर्पण दिव्य प्रेम से ,मधुर रागिनी हो जाता मन।नव सृजन इस सृष्टि का,निर्माणों उन्मुख है जीवन।। ज्ञानमयी देवी की वीणा,गूंजे दसों दिशाओं में ।अज्ञानता से कहीं दूर ,अंतः ज्ञान की उषाओं में।।

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पुष्प की यात्रा

अवधेश झा सीमा नहीं है, इस परिसीमन काखंड खंड में, बिखरा है मेला ।कन्ही दूर – दूर खड़ा है कोईअसंख्य तारों के मध्य अकेला ।। पूनम रात्रि की संध्या बेला,मध्यम, शीतल ऋतु अलबेला।जागृत तम, नव पंकज हृदयझांके जैसे बसंत की बेला।।

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पुष्प – योगिनी

अवधेश झा योग प्रभाती,सहज ही गाती,करती है नित्य प्राणायाम।वज्रासन लगा कर बैठे,श्वास पर होती है ध्यान।। यम-नियम से शुभारंभ करके,पतंजलि अष्टांग योग को प्रणाम।प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधिदिव्य-संकल्प बिना नहीं बनते काम।।

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पुष्प की वीरता

अवधेश झा अर्जुन के धनुष से निकली,राम की हूं मैं साध्य तीर।देखन में हूं सहज-सुंदर,घाव होते मेरे बहुत गंभीर।। वीरों के वक्षस्थल पर शोभती,शस्त्रों की होती है हम से पूजा।वीरांगाओं की मन की शक्ति हूं मैं,घर की पूजा में, मेरे सिवा न दूजा।।

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पुष्प का प्रेम

अवधेश झा मानस पटल से दर्शन,और खुले आंखों से बेचैन ।जग देखे जिस आंखों सेसास्वत सौंदर्य, वो है मेरी नैन।। मिलूं, गले लगू या अर्पित हूंमैं,जग से उनको समर्पित हूं।मुझे व्यथा नहीं मुरझाने की,मैं हर अवस्था में सारगर्भित हूं ।।

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पुष्प की भावना

अवधेश झा कांटो में भी रहकर,सुंदरता की मूरत ।ईश्वर हो या मनुजहै, तुम्हारी जरूरत ।। खिले जहां, खिल जाते हैवर्षों से सहमे मुस्कान उहां।महके तो महक उठे तन-मनपल्लवित पुष्पित वन उपवन।।

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