पुष्प की यात्रा

अवधेश झा सीमा नहीं है, इस परिसीमन काखंड खंड में, बिखरा है मेला ।कन्ही दूर – दूर खड़ा है कोईअसंख्य तारों के मध्य अकेला ।। पूनम रात्रि की संध्या बेला,मध्यम, शीतल ऋतु अलबेला।जागृत तम, नव पंकज हृदयझांके जैसे बसंत की बेला।।

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पुष्प – योगिनी

अवधेश झा योग प्रभाती,सहज ही गाती,करती है नित्य प्राणायाम।वज्रासन लगा कर बैठे,श्वास पर होती है ध्यान।। यम-नियम से शुभारंभ करके,पतंजलि अष्टांग योग को प्रणाम।प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधिदिव्य-संकल्प बिना नहीं बनते काम।।

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पुष्प की वीरता

अवधेश झा अर्जुन के धनुष से निकली,राम की हूं मैं साध्य तीर।देखन में हूं सहज-सुंदर,घाव होते मेरे बहुत गंभीर।। वीरों के वक्षस्थल पर शोभती,शस्त्रों की होती है हम से पूजा।वीरांगाओं की मन की शक्ति हूं मैं,घर की पूजा में, मेरे सिवा न दूजा।।

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पुष्प का प्रेम

अवधेश झा मानस पटल से दर्शन,और खुले आंखों से बेचैन ।जग देखे जिस आंखों सेसास्वत सौंदर्य, वो है मेरी नैन।। मिलूं, गले लगू या अर्पित हूंमैं,जग से उनको समर्पित हूं।मुझे व्यथा नहीं मुरझाने की,मैं हर अवस्था में सारगर्भित हूं ।।

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पुष्प की भावना

अवधेश झा कांटो में भी रहकर,सुंदरता की मूरत ।ईश्वर हो या मनुजहै, तुम्हारी जरूरत ।। खिले जहां, खिल जाते हैवर्षों से सहमे मुस्कान उहां।महके तो महक उठे तन-मनपल्लवित पुष्पित वन उपवन।।

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पुष्प का मन

अवधेश झा पुष्प सुगंधित मन में,प्रिय खुसबू है आधार ।हृदय तरंगनी नव बसंत की,अभिलाषा तुम उसपार ।। दर्शन- सृजन प्रकृति की,नव नव आनंद का शृंगार ।तुम में भी वही हृदय छुपा,जिससे होता भाव विस्तार ।।

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“पगड़ी संभाल जट्टा “।। “पगड़ी संभाल ओ” ।।

Written By – Lovely singh पिछले करीब दो महीने से कृषि कानून का विरोध कर रहे किसान प्रदर्शनकारियों के ऊपर यह ऐतिहासिक जुमला “पगड़ी संभाल जट्टा” बिल्कुल सटीक बैठ रहा है। आज भी इस यादगार गीत को सुनते ही लोगों की ज़ेहन में किसानों के गौरव व आत्समम्मान की लहर दौड़ने लगती है। जब किसान […]

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गुरुगोविंद सिंह की 354 वें प्रकाशपर्व की सभी तैयारियाँ पूरी

-जितेन्द्र कुमार सिन्हा पटना, 19 जनवरी :: सिखों के दसवें गुरु गुरुगोविंद सिंह की 354 वें प्रकाशपर्व के अवसर पर 19 जनवरी (मंगलवार) को पटना साहिब गुरुद्वारा में प्रकाश उत्सव और बाल लीला में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर देश-विदेश से भी सिख तीर्थयात्री पटना साहिब गुरुद्वारा में प्रकाश उत्सव और बाल लीला […]

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लोग व्हाट्सएप्प , फेसबुक पर देवनागरी के बजाए रोमन में चैट करना पसंद करते है: मिथलेश तिवारी।
By Kumari Swati.
भारत मे बदलते समय के साथ साथ बहुत कुछ बदल रहा है। ऐसे में इस बादलाव में हम इतने उलझ गए है कि हम यह भी भूल गए है कि हमारी असली मिट्टी क्या है, और उसकी सही पहचान क्या है। हिंदी भाषा जो हमारी मातृ भाषा है , जो हमे हमारी मातृभूमि से जोड़ती है , उससे हम दिन पर दिन दूर होते जा रहे है। ऐसे मैं ये हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है कि हम अपनी भाषा के लिए कुछ करे जिससे हमारी भाषा , हमारे आने वाली पीढ़ी को वैसे ही मिले , जैसे कि हमारे पूर्वजों ने हमे सौंपि थी। इसी बात पर चर्चा करने के लिए हिन्द चक्र की टीम ने खास बातचीत की “मिथलेश तिवारी जी “से जो क्राइस्ट चर्च डायोसेशन स्कूल में हिंदी विषय के शिक्षक है, इन्होंने बड़ी बेबाकी से सारे सवालो का जवाब दिया ।

1.भारत मे हिंदी की स्थिति क्या है?भारत मे हिंदी की स्थिति से हम सभी अवगत है। आज के इस दौर में लोग आधुनिकता के तरफ ऐसे चलते चले जा रहे है , की उन्हें अपनी असल मातृ भाषा बोलने में शर्म आती है। लोग सोशल मीडिया पर , तीन सौ पैसठ दिन में बस एक […]

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