भारत का पर्यावरणीय पुनर्जागरण

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  • अवधेश झा

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हरित भारत की दिशा में एक क्रांति कदम है।
वेद कहता है: “माता भूमिः पुत्रोऽहम पृथिव्याः” — अथर्ववेद
प्रकृति के प्रति श्रद्धा भारत की सनातन परंपरा का मूल है। किंतु बीते दशकों में जिस प्रकार जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता की हानि ने विश्व को चिंता में डाला, उस संदर्भ में भारत का नेतृत्व एक प्रेरणा बनकर उभरा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने न केवल पर्यावरणीय नीतियों को सशक्त किया, बल्कि जन-सहभागिता के साथ एक हरित चेतना आंदोलन को जन्म दिया। यह लेख भारत की उसी परिवर्तनकारी यात्रा की कथा कहता है।

वैश्विक मंच पर भारत की हरित प्रतिबद्धता: भारत अब “अनुयायी” नहीं, बल्कि “नेता” है। पेरिस समझौता (COP21) में भारत ने 2030 तक 40% ऊर्जा गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा — जो 2021 में ही प्राप्त कर लिया गया। ग्लासगो (COP26) में प्रधानमंत्री मोदी ने “LIFE (Lifestyle for Environment)” का नारा दिया — एक वैश्विक अभियान की शुरुआत।COP29 (बаку, 2024) में भारत ने जलवायु नेतृत्व में महिलाओं, युवाओं और तकनीक के सहयोग पर बल दिया।

अक्षय ऊर्जा में भारत की छलांग और सौर शक्ति तथा सूर्य से समृद्धि 2014 में भारत की सौर क्षमता मात्र 2.82 GW थी — 2025 में यह 71.78 GW हो चुकी है। विश्व में सबसे सस्ती सौर बिजली भारत में उपलब्ध: ₹2.15 प्रति यूनिट।

पवन ऊर्जा क्षेत्र में 2014 में 21 GW → 2025 में 50 GW तथा 2030 तक लक्ष्य: 140 GW है। परमाणु ऊर्जा में वर्तमान क्षमता: 8.78 GW तथा भविष्य में लक्ष्य: 2047 तक 100 GW है।

हरित नवाचार और मिशन: अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): भारत की पहल, अब 100+ देश शामिल। लक्ष्य: $1 ट्रिलियन का निवेश, सौर समृद्धि के लिए। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन हैं। जिसमें 5 MMT उत्पादन, ₹8 लाख करोड़ निवेश और 6 लाख रोजगार की संभावना है।

पीएम सूर्य घर योजना में लाखों घरों में रूफटॉप सोलर तथा एक-एक गांव को “सौर आदर्श ग्राम” बनाया जा रहा है।

वन्य जीवन और जैव विविधता संरक्षण के तहत बाघों की वापसी की गई। जिसमें 2014 में 1700 → 2022 में 3682 बाघ, इसमें भारत: विश्व की 75% बाघ आबादी का घर है।

प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत 70 वर्षों बाद चीतों की वापसी हुई है। कुनो नेशनल पार्क में चीतों का पुनःप्रवेश हुआ है।

प्रोजेक्ट लायन के अंतर्गत एशियाई शेरों की सुरक्षा हेतु ₹155 करोड़ का प्रावधान तथा गिर वन क्षेत्र में वृद्धि है।

रामसर स्थल और आर्द्र भूमियाँ में 2014 में 26 → 2024 में 85 तथा भारत अब आर्द्रभूमि संरक्षण में वैश्विक अग्रणी है।

गंगा: राष्ट्रीय नदी का पुनरुद्धार के लिए “नमामि गंगे” मिशन ने गंगा को केवल स्वच्छ ही नहीं, बल्कि “जैविक रूप से पुनर्जीवित” भी किया। गंगा डॉल्फिन, मछलियाँ, प्रवाल — सब में वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत निगरानी ने इसे जन आंदोलन में बदला गया है।

स्वच्छ भारत से वृत्ताकार अर्थव्यवस्था तक स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 12 करोड़+ शौचालय निर्माण हुआ है और 100% ODF दर्जा तथा कचरा प्रबंधन में नवाचार और निजी सहभागिता बढ़ी है।

गोबरधन योजना के अंतर्गत गोबर से बायोगैस और जैविक खाद तथा ग्रामीण आय और स्वच्छता दोनों में वृद्धि हुई है।

“एक पेड़ माँ के नाम” — प्रकृति से आत्मीय संबंध; इस अभियान के तहत 5 जून 2024 तक 142 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। हर नागरिक को वृक्षारोपण में भागीदार बनाकर यह अभियान एक संवेदनात्मक हरित क्रांति बना है।

भारत: हरित नेतृत्व का प्रतीक भारत में कार्बन उत्सर्जन विश्व के औसत से कहीं कम, फिर भी प्रयास सबसे अधिक हुए हैं; 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा का लक्ष्य रखा है। कार्बन न्यूट्रल पंचायत, ब्लू फ्लैग समुद्रतट, सौर ग्राम, हरित हाइड्रोजन — ये सब भारत को 21वीं सदी का पर्यावरणीय अग्रदूत बना रहे हैं।

प्रकृति-राष्ट्र के अभिन्न संबंध की पुनर्पुष्टि है। भारत का यह पर्यावरणीय परिवर्तन किसी सरकारी कार्यक्रम मात्र नहीं, बल्कि एक संस्कृतिक पुनर्जागरण है —
जहाँ विकास और प्रकृति एक साथ चलते हैं, जहाँ विज्ञान और परंपरा का संतुलन है और जहाँ जनभागीदारी, तकनीक और नेतृत्व मिलकर एक नए भारत की नींव रख रहे हैं। “पृथ्वी केवल संसाधन नहीं, वह हमारी माँ है। उसकी रक्षा, हमारा धर्म है।”

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