पटना में होगा ऑक्यूपेशनल थेरेपी का राष्ट्रीय महाकुंभ, AIOTA ने की तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की घोषणा

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अखिल भारतीय ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट संघ (AIOTA) बिहार शाखा एवं बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी एंड ऑक्यूपेशनल थेरेपी, विकलांग भवन अस्पताल, पटना के संयुक्त तत्वावधान में आगामी 5 फरवरी 2027 से 7 फरवरी 2027 तक पटना के ज्ञान भवन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की औपचारिक घोषणा एक भव्य शुभारंभ समारोह (Launching Ceremony) के माध्यम से की गई, जिसमें देशभर के ऑक्यूपेशनल थेरेपी विशेषज्ञों के साथ बिहार सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री भी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर AIOTA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पंकज वाजपेयी विशेष रूप से पटना पहुंचे। उन्होंने राष्ट्रीय सम्मेलन की तिथियों की आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि ऑक्यूपेशनल थेरेपी आज स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा नवीनतम शोध एवं तकनीकों को साझा करने के लिए इस प्रकार के राष्ट्रीय सम्मेलन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने देश एवं विदेश के ऑक्यूपेशनल थेरेपी विशेषज्ञों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों से इस सम्मेलन में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य विषय (Theme) “Occupational Therapy and Health: From Prevention to Occupational Justice” निर्धारित किया गया है। यह थीम स्वास्थ्य संरक्षण, पुनर्वास, सामाजिक समावेशन तथा प्रत्येक व्यक्ति को उसके दैनिक जीवन एवं कार्यों में समान अवसर उपलब्ध कराने की अवधारणा को केंद्र में रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑक्यूपेशनल थेरेपी केवल रोगियों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने, जीवन की गुणवत्ता सुधारने और समाज में उसकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का माध्यम भी है। सम्मेलन में इसी विषय पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वानों द्वारा विचार-विमर्श किया जाएगा।

सम्मेलन की तैयारियों को लेकर जानकारी देते हुए बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी एंड ऑक्यूपेशनल थेरेपी, पटना के ऑक्यूपेशनल थेरेपी विभागाध्यक्ष सह नियंत्रण अधिकारी, AIOTA बिहार शाखा के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. प्रियदर्शी आलोक ने बताया कि सम्मेलन को सफल बनाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन बिहार के लिए गौरव का विषय है क्योंकि पहली बार इतने बड़े स्तर पर ऑक्यूपेशनल थेरेपी से जुड़ा राष्ट्रीय सम्मेलन राजधानी पटना में आयोजित होने जा रहा है। इससे राज्य के विद्यार्थियों, चिकित्सकों तथा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों को नई जानकारी और अवसर प्राप्त होंगे।

इस अवसर पर सम्मेलन समिति से जुड़े कई प्रमुख विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे। इनमें डॉ. अभय कुमार जायसवाल, जो कॉन्फ्रेंस कमिटी के सलाहकार एवं AIOTA बिहार शाखा के पूर्व संयोजक हैं, ने सम्मेलन की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. संतोष कुमार को वैज्ञानिक समिति (Scientific Committee) का चेयरमैन बनाया गया है, जबकि डॉ. उदय कुमार पंजीकरण समिति (Registration Committee) के चेयरमैन के रूप में कार्य कर रहे हैं। AIOTA बिहार शाखा के उपाध्यक्ष डॉ. रंजनेश चन्द्र विद्यार्थी ने भी सम्मेलन की सफलता के लिए सभी सदस्यों से सहयोग की अपील की।

शुभारंभ समारोह में बिहार सरकार के कई सम्मानित मंत्री उपस्थित रहे। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री डॉ. अशोक चौधरी, जो इस राष्ट्रीय सम्मेलन के मुख्य संरक्षक भी हैं, ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य और पुनर्वास के क्षेत्र में ऑक्यूपेशनल थेरेपी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसके अतिरिक्त लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन, खनन एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चन्द्रवंशी, परिवहन मंत्री दामोदर रावत, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री संजय सिंह तथा ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार ने भी अपने कर-कमलों से सम्मेलन के शुभारंभ समारोह को संपन्न कराया और आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दी।

आयोजकों के अनुसार इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के विशेषज्ञ, शोधकर्ता, चिकित्सक, शिक्षक एवं विद्यार्थी भाग लेंगे। सम्मेलन के दौरान वैज्ञानिक शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे, कार्यशालाएं आयोजित होंगी तथा ऑक्यूपेशनल थेरेपी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास पर चर्चा होगी। यह आयोजन न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में ऑक्यूपेशनल थेरेपी के विकास को नई दिशा प्रदान करेगा। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं में पुनर्वास और सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूत करने का भी महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

ज्ञान भवन, पटना में फरवरी 2027 में आयोजित होने वाला यह राष्ट्रीय सम्मेलन ऑक्यूपेशनल थेरेपी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक आयोजन सिद्ध होने की उम्मीद है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी, वैज्ञानिक चर्चाएं और आधुनिक शोध प्रस्तुतियां इसे स्वास्थ्य एवं पुनर्वास क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बनाएंगी। बिहार की धरती पर होने वाला यह आयोजन राज्य की बढ़ती शैक्षणिक और स्वास्थ्य संबंधी पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक होगा।

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