राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग बना चौथे स्तंभ की आवाज – सेवानिवृत्त IPS-IAS अधिकारियों और वरिष्ठ पत्रकारों का मिला मार्गदर्शन

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पत्रकारिता केवल समाचार संकलन और प्रसारण का माध्यम नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा और समाज को जागरूक रखने का महत्वपूर्ण दायित्व है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकारिता ने हमेशा सत्ता, व्यवस्था और समाज के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका निभाई है। लेकिन बदलते समय में पत्रकारों के सामने चुनौतियां भी तेजी से बढ़ी है। पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान, सामाजिक प्रतिष्ठा, आर्थिक स्थिरता और पेशेवर अधिकारों से जुड़े सवाल आज गंभीर चिंता का विषय है। विशेष रूप से छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकारों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं के समाधान और पत्रकारिता जगत को एक संगठित राष्ट्रीय मंच देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग (National Patrakar Suraksha Aayog) सक्रिय पहल कर रहा है।

रेगुलेशन संख्या 14/25 के तहत पंजीकृत इस संगठन ने राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसी नेतृत्व टीम तैयार की है, जिसमें सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षाविदों और अनुभवी पत्रकारों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य केवल पत्रकारों की समस्याओं को उठाना नहीं है, बल्कि उनके समाधान के लिए एक प्रभावी और व्यवस्थित व्यवस्था विकसित करना है।

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग का मानना है कि पत्रकारिता से जुड़े लोगों की अनेक समस्याओं का प्रमुख कारण उनका असंगठित होना भी है। अलग-अलग राज्यों और मीडिया संस्थानों में काम करने वाले पत्रकारों की चुनौतियां भले ही अलग हो, लेकिन उनकी मूल आवश्यकताएं समान है। सुरक्षा, सम्मान, निष्पक्ष कार्य करने की स्वतंत्रता, आर्थिक संरक्षण और कानूनी सहायता प्रत्येक पत्रकार की जरूरत है।

आयोग का प्रमुख उद्देश्य देशभर के पत्रकारों को एक साझा मंच पर लाना, उनकी सामूहिक समस्याओं को समझना और संबंधित सरकारी तथा प्रशासनिक संस्थाओं तक उनकी आवाज पहुंचाना है। संगठन पत्रकारों के बीच आपसी सहयोग, संवाद और एकजुटता को मजबूत करने की दिशा में काम करने का संकल्प रखता है।

मीडिया का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले पत्रकारिता मुख्य रूप से समाचार पत्रों और टेलीविजन चैनलों तक सीमित थी, लेकिन आज वेब पोर्टल, डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया आधारित समाचार माध्यमों ने भी अपनी महत्वपूर्ण जगह बना ली है।

आयोग का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य डिजिटल और वेब मीडिया में कार्यरत पत्रकारों को भी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों के समान पहचान, सम्मान और अधिकार दिलाने की पहल करना है। आयोग का मानना है कि पत्रकारिता का मूल्यांकन केवल माध्यम के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी विश्वसनीयता, जिम्मेदारी और जनहित में किए जा रहे कार्यों के आधार पर होना चाहिए। डिजिटल मीडिया के विस्तार के साथ पत्रकारों की पहचान, मान्यता और सुरक्षा से जुड़े नए प्रश्न सामने आए हैं। ऐसे में सभी माध्यमों के पत्रकारों के लिए समान अवसर और उचित संस्थागत संरक्षण की आवश्यकता है।
आयोग के राष्ट्रीय संरक्षक मंडल में प्रशासन और पुलिस सेवा के अनुभवी अधिकारियों को स्थान दिया गया है। इनमें बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) एवं सेवानिवृत्त IPS अधिकारी श्री पी.के. ठाकुर तथा झारखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं सेवानिवृत्त IPS अधिकारी श्री अजय कुमार सिंह शामिल है। इन वरिष्ठ अधिकारियों का अनुभव संगठन को रणनीतिक मार्गदर्शन और संस्थागत समझ प्रदान करने में महत्वपूर्ण हो सकता है। पुलिस एवं प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली का उनका अनुभव पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर संवाद को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगा।

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग ने अपने सलाहकार मंडल में विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी व्यक्तित्वों को शामिल किया है। सेवानिवृत्त IAS अधिकारियों में श्री बिपिन कुमार सिंह, श्री अविनाश कुमार सिंह और डॉ. रणबीर कुमार सिंह को राष्ट्रीय सलाहकार की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, सेवानिवृत्त IPS अधिकारियों और विशेषज्ञों में श्री सतीश कुमार शर्मा, डॉ. चौरसिया चंद्रशेखर आजाद, श्री विनोद कुमार, श्री जितेंद्र मिश्रा, श्री वरुण सिन्हा और श्री मुकेश कौशिक शामिल हैं। शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े डॉ. प्रो. अमरेंद्र प्रसाद सिंह भी राष्ट्रीय सलाहकार मंडल का हिस्सा हैं। इस प्रकार आयोग ने प्रशासनिक अनुभव, पुलिस व्यवस्था, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों को एक मंच पर लाने की कोशिश की है।

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में श्री निशिकांत राय को जिम्मेदारी सौंपी गई है। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री सत्यनारायण भट्ट हैं। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में श्री मनोज के. शर्मा और श्री संदीप चौधरी संगठन को नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं। राष्ट्रीय महासचिव के पद पर डॉ. प्रो. निशा सिंह कार्यरत हैं। राष्ट्रीय जांच सचिव श्री अर्पित कुमार, राष्ट्रीय सचिव श्रीमती संघमित्रा सिंह, राष्ट्रीय संयुक्त सचिव श्री सुदर्शन कुमार, श्री रजनीश पुष्कर और श्री अमिया मलिक को बनाया गया है। राष्ट्रीय संगठन सचिव के रूप में श्री लव व्यास तथा उपसचिव के रूप में श्री श्रीयम दुबे को जिम्मेदारी दी गई है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य के रूप में श्री संदीप कुमार, श्री एस.एस. चंदेल, श्री लक्ष्मीकांत पटेल, श्री विनय कुमार तिवारी, श्रीमती निभा शर्मा, श्री निशांत भारती, श्री अमितेश श्रीवास्तव, श्री जितेंद्र राज और श्री संजय कुमार मिश्रा शामिल हैं।

किसी भी संगठन की सफलता के लिए उसके विचारों, उद्देश्यों और गतिविधियों को समाज तक पहुंचाना आवश्यक होता है। इसी दृष्टि से राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग ने मीडिया एवं जनसंपर्क व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है। राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख की जिम्मेदारी श्री जितेंद्र कुमार सिन्हा को सौंपी गई है। राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में श्री जीवन ज्योति और श्री संतोष कुमार संगठन की बात सार्वजनिक मंचों तक पहुंचाने का दायित्व निभा रहे हैं। राष्ट्रीय मीडिया नेतृत्व का उद्देश्य आयोग की गतिविधियों, पत्रकारों की समस्याओं और संगठन के उद्देश्यों को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक तथा डिजिटल मीडिया के माध्यम से व्यापक स्तर पर सामने लाना है।

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग ने देश के विभिन्न राज्यों में अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी पहल की है। उत्तर प्रदेश के राज्य प्रभारी के रूप में श्री जीवन कुमार झा और श्री अरविंद श्रीवास्तव को जिम्मेदारी दी गई है। छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष श्री दीपक श्रीवास्तव तथा उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष श्री योगेश भट्ट हैं। बिहार के राज्य प्रभारी श्री लक्ष्मीकांत पटेल बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त पंजाब में श्री बलराज शर्मा, दिल्ली में डॉ. वारिस अहमद खान, राजस्थान में श्री अनिल व्यास, ओडिशा में श्री बंशीधर जेना, झारखंड में श्री सुनील कुमार, पश्चिम बंगाल में श्री दिलीप कुमार दास और मणिपुर में श्री थोकचोम रंजीत सिंह को संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई है। तमिलनाडु में पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री एन.टी. षणमुगम प्रदेश अध्यक्ष के रूप में संगठन का नेतृत्व कर रहे हैं। इस राज्यस्तरीय नेतृत्व का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पत्रकारों की समस्याओं की पहचान करना और उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना है।

पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान की चर्चा लंबे समय से होती रही है। लेकिन वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है, जब इन उद्देश्यों को ठोस कार्ययोजना, प्रभावी संवाद और परिणामोन्मुख प्रयासों में बदला जाए। केवल पदाधिकारियों की सूची या संगठन का विस्तार किसी संस्था की सफलता का प्रमाण नहीं हो सकता। असली सफलता तब होगी, जब किसी संकट में फंसे पत्रकार को समय पर सहायता मिले, किसी पत्रकार के साथ अन्याय होने पर उसकी आवाज सुनी जाए और आर्थिक तथा सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रभावी पहल हो। राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के सामने भी यही सबसे बड़ी चुनौती और अवसर है। सेवानिवृत्त IAS-IPS अधिकारियों, वरिष्ठ पत्रकारों, शिक्षाविदों और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों का सामूहिक अनुभव इसकी ताकत बन सकता है।

लोकतंत्र का चौथा स्तंभ तभी मजबूत होगा, जब उसकी नींव में खड़े पत्रकार सुरक्षित, सम्मानित और आत्मनिर्भर होंगे। पत्रकारों की सुरक्षा केवल पत्रकार समुदाय का मुद्दा नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों से जुड़ा व्यापक प्रश्न है। राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग की पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखी जा सकती है। अब अपेक्षा है कि यह संगठन अपने घोषित उद्देश्यों को धरातल पर उतारकर देशभर के पत्रकारों के लिए भरोसेमंद सहयोगी मंच बनेगा

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