शिक्षायतन पटना द्वारा आयोजित “देवि देहिनो बलं” दुर्गा उत्सव कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरूआत दुर्गा वंदना – जय जय जय मां दुर्गे भवानी..से प्रारंभ हुआ
कथक नृत्य शैली में नन्हे
कलाकारों – अर्पिता, लावण्या, शिवन्या, निर्जा, अदविता, अनुश्री ने नृत्य किया।
गायन कलाकारों ने भगवद स्तुति : देवि हरो दुख दुर्गा भवानी….और जय जय भैरवी असुर भयावानी . गीत से किया। मुख्य गायक कलाकार मानस मिश्रा तथा अमित प्रकाश तबले पर संगत कर रहे थे। गिटार पर राग दुर्गा प्रस्तुत हुए।
कथक नृत्यांगना गुरु यामिनी ने माता दुर्गा और नव रसों को संबंधित करते हुए उनका व्याख्यान दिए । उन्होंने बताया कि माँ दुर्गा की नौ रूप और भारतीय शास्त्रीय नृत्य व नाट्यशास्त्र के नवरस भाव (शृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, अद्भुत और शांत) आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। देवी दुर्गा के प्रत्येक स्वरूप में इन नौ रसों में से कोई न कोई प्रमुख रस साक्षात झलकता है।माँ दुर्गा का पूरा प्राकट्य और उनकी लीलाएँ इन नौ रसों का ही संपूर्ण विस्तार हैं, जो जीवन के हर पड़ाव पर मनुष्य को अलग-अलग भावनाओं और ऊर्जा से परिचित कराती हैं।
गुरु यामिनी द्वारा नृत्य संरचना और निर्देशन में
मां कालिका (नृत्य नाटिका), की प्रस्तुति नृत्य विभाग से कथक नृत्यांगना – पीयूषी मिश्रा, कंचन प्रिया, आकृति अवस्थी, अवनी श्रेया, समीक्षा द्विवेदी, अवनी कुमारी ने प्रस्तुत किया।
बंगाल की धुनुची तान्या शर्मा, आकृति अवस्थी द्वारा बंगाल की आभा से समा को भव्य बना दिया।
बिहार का झिझिया नृत्य अवनी और सोनम ने बिहार की भक्ति भाव को प्रस्तुत किया ।
अंत में गुजरात का गरबा और डांडिया की अद्भुत प्रस्तुति हुई।
तथा मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की चित्रकला प्रदर्शनी डिजिटली सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।
अतिथि व अभिभावकों की उपस्थिति में गुरु यामिनी कथक नृत्यांगना द्वारा पुष्पांजलि अर्पित किया गया।
कार्यक्रम का संयोजन पीयूष मिश्रा, कंचन प्रिया और अवनी श्रेया ने तथा नृत्य रचना गुरु यामिनी (कथक नृत्यांगना) द्वारा रचित थे।
