पटना: 3 जून 2026 :: संगीत शिक्षायतन पटना में आज कला प्रवाह के तहत संगोष्ठी सह सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन सात्विक रूप में किया गया।
संगोष्ठी का विषय “भाव और रस” था। जिसे बड़े बखूबी रूप से तीन विशेषज्ञ जो साहित्य और कला जगत के मूर्धन्य व्यक्तित्व है विषय को उजागर किया। अपने व्याख्यान से दर्शकों को मुग्ध किया।
शिक्षार्थियों में रस और भाव को लेकर सारी जिज्ञासाओं को शांत करने का प्रयास किया।
संगोष्ठी की शुरुवात दीप प्रज्वलन से हुई। शिक्षायतन के नृत्य विद्या से कलाकारों द्वारा विष्णु वंदना “शान्ताकारम” की दिव्य प्रस्तुति हुई।
व्याख्यान की शुरुआत साहित्य जगत नम्रता कुमारी संस्कृत शिक्षिका ने मूल विषय ” भाव और रस ” की व्याख्या की। नम्रता कुमारी स्वयं संगीत के गायन शैली ध्रुवपद घराने से संबंधित एक सुप्रसिद्ध गायिका है। आपने अपने व्याख्यान में रस भाव उसके प्रकारों को बेहतर तरीके से समझाया। और भाव को उद्दीपित करने वाले गाने का प्रायोगिक स्वरूप प्रस्तुत किया।
दूसरे व्याख्याता रविकांत सिंह (सीने अभिनेता) थियेटर और सिनेमा साथ ही रस की उत्पत्ति की उत्तम उदाहरण देते हुए दर्शकों को बंधे रखा। आपने अंधा युग नाटक के अंश से बेहतरीन उदाहरण देकर दर्शकों को भाव और रस का स्पंदन कराया।
आज के संगोष्ठी के तीसरी व्याख्याता यामिनी कथक नृत्यांगना ने आंगिक भाव, हस्त मुद्रा, और मुखज भाव की अवधारणा को स्पष्ट किया। हस्तक, दृष्टि भेद के महत्वों को बताया तथा नवरसों को अपने मुखज़ भाव से परिभाषित किया।
संगोष्ठी का विराम सितार वादक प्रतीक बनर्जी के सितार वादन से हुआ। आपने बिहाग रग में गत और झाला बजाया। तबला पर सुप्रसिद्ध तबला वादक अमरनाथ ठाकुर ने सुदृढ़ वादन के साथ संगत किया।
सभी विशेषज्ञों ने शिक्षायतन प्रांगण का सभागार नृत्य संगीत और शिक्षा के बौधिक विकास का समुचित वातावरण स्थापित किया।
शिक्षायतन की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने बताया कि शिक्षायतन पटना के उद्देश्य में कला प्रवाह है, जिसमें सेमिनार, वर्कशॉप, प्रतियोगिता शामिल है, जो कला के संवर्धन और संरक्षण का कार्य करती है। जो आज उपस्थित कलाकारों ने अपने प्रदर्शन तथा व्याख्याताओं ने अपने व्याख्यान से सफलीभूत किया।
सभी विशेषज्ञों और कलाकारों को शॉल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संयोजन रवि मिश्रा द्वारा किया गया था।तथा सुगठित शब्दों से फौजिया ने कार्यक्रम को बांधे रखा।
धन्यवाद ज्ञापन यामिनी, सचिव, संगीत शिक्षायतन पटना द्वारा किया गया।

