पटना : नेपाल – भारत सांस्कृतिक आदान प्रदान के तहत बिहार की तीन शास्त्रीय संगीत -नृत्य कलाकारों को काठमांडू, नेपाल में सम्मानित किया गया. पिछले दिनो नेपाल की प्रसिद्द सांस्कृतिक संस्था, किरातेश्वर संगीताश्रम ने काठमांडू में आयोजित पूर्णिमा संगीत समारोह में इन तीनो कलाकारों, डॉ रीता दास, बिहार की एकमात्र महिला सरोद कलाकार, डॉ रेखा, शास्त्रीय गायिका और डॉ रमा दास, बिहार सरकार से अम्बपाली पुरस्कार से विभूषित वरिष्ठ कत्थक गुरू को सम्मान पत्र और अंगवस्त्र देकर किरातेश्वर सम्मान से विभूषित किया.
संगीत समारोह ने भारत और नेपाल, दोनो देशों के शास्त्रीय संगीत कलाकारों ने प्रस्तुतियाँ दीं जिसमें भारत, नेपाल से लेकर कई देशों के श्रोता मौजूद रहे.
आयोजक रूपा न्योपाने ने कहा कि यह संस्था नेपाल में विशुद्ध हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के संरक्षण और प्रोमोशन के लिए यह संगीत समारोह करती है. इस बार समारोह में बिहार के कलाकारों को भी शामिल किया गया है जो नेपाल – भारत सांस्कृतिक आदान प्रदान की दिशा में संस्था की एक पहल है. रुपा न्योपाने ने कहा कि यह एक शुरुआत है और संस्था आगे भी इस दिशा में काम करती रहेगी.
कार्यक्रम की शुरुआत नेपाल की सानू तमांग के शास्त्रीय गायन से हुई. उनके साथ तबला पर थे नेपाल के ही निमेष कापली. कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण था सरोद वादन जिसे बिहार की पहली महिला सरोद कलाकार ने प्रस्तुत किया. संध्याकालीन रागेश्वरी में सुरीला आलाप और स्वर विस्तार ने समा बांधा तो लयबद्ध गतों में लयकारी और तीव्र गति के तानों ने श्रोताओं को बहुत प्रभावित किया. रीता दास ने राजस्थान के मांड धुन से कार्यक्रम का समापन किया. उनके तबला पर थे नेपाल के तबला वादक अनंत प्रजापति.
इसके पहले बिहार की डॉ रेखा और नेपाल की सुरभि पौडेल ने कुछ सुमधुर भजन सुनाए. उनके साथ तबला पर थे नेपाल के विपुल.
