धार्मिक व्यक्ति को कितना ही संताप दो, वह स्नेह ही देगा
सत्यनारायण प्रसाद पटना :: संस्कृत का कवि बैठा था और अजीबोगरीब हरकते कर रहा था। कभी-कभी ऐसा होता था कि आदमी प्रयोग की भूमिका में दिखता था, तो कभी उसका व्यवहार असामान्य हो जाता था। यह कवि अपने सामने एक तराजू रखे हुआ था और पास में दूध से भरा पात्र है। कवि चिंतन में […]
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