प्रेम की पीड़ा में ही, प्रेम की पराकाष्ठा है
यामिनी, कथक डांसर अब वह प्रेम आत्मा, परमात्मा, व्यक्ति या वस्तु किसी से भी ही सकती है। प्रेम तो वैसे भी बिना स्वार्थ के होता है, फिर वह साधना भी होती है। साधना कलात्मक भी हो सकती है। सच कहा जाए तो प्रेम तो अपने अंदर होता है और वही प्रेम किसी विशिष्ट पर परिलक्षित […]
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