आयाम और नवगीतिका की महफ़िल
पटना, 29 मार्च 2022 :: शाख़ शजर की गुल भँवरे की जैसी तुझसे निस्बत है, ये सब तुझको मैं बतला दूँ ऐसा सोचा करती हूँ। दिल का शीशा साफ़ हुआ तो आँखों में दिख जाएगा।मैं भी कुछ आँसू छलका दूँ ऐसा सोचा करती हूँ।। सुनता है रब सजदों में ही रोने वालों की फ़रियाद।मैं भी […]
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